भारतीय हॉकी टीम ने पिछले दिनों ओलिंपिक और विश्वकप की विजेता जर्मनी,यूरोपीय चैंपियन नीदरलैंड और दुनिया की सातवें नंबर की टीम न्यूज़ीलैंड का सामना किया है.
चंडीगढ़ में खेले जा रहे चार देशों के पंजाब गोल्ड कप हॉकी के पहले दौर में भारत ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए दो मैच जीते और एक ड्रा किया.
शानदार शुरुआत
बीजिंग ओलंपिक के लिए तो भारत की टीम क्वालिफ़ाई नहीं कर पाई थी लेकिन इस प्रतियोगिता में भारत ने न्यूज़ीलैंड को 2-0 से हराया, नीदरलैंड के साथ मैच 4-4 से ड्रा किया और जर्मनी को 2-0 से मात दी.
पहले दौर के बाद ट्राफ़ी पर कब्ज़ा करने के लिए ये टीमें एक बार फिर आमने-सामने होंगी.
लेकिन भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन ने इस बात की उम्मीदें बढ़ा दी हैं कि टीम को 'नया जीवन' मिल सकता है. टीम बहुत आत्मविश्वास के साथ खेली और उसने अपने प्रतिद्वंद्वियों को शिष्टता के साथ घेरने की कोशिश की.
यहाँ यह उल्लेखनीय है कि भारतीय टीम दबाव में नहीं आई, उस समय भी नहीं जब नीदरलैंड की टीम ने दो गोल की बढ़त ले ली थी लेकिन इसके बाद भारतीय खिलाड़ियों ने आक्रामक खेल का प्रदर्शन करते हुए मध्यांतर से तीन मिनट पहले तीन गोल कर दिए.
यह भारतीय टीम के उस आत्मविश्वास की कहानी कहता है जो कि ओलंपिक के लिए क्वालीफ़ाई न कर पाने के बाद से ग़ायब दिख रहा था.
हौसला भारतीय टीम दबाव में नहीं आई, उस समय भी नहीं जब नीदरलैंड की टीम ने दो गोल की बढ़त ले ली थी लेकिन इसके बाद भारतीय खिलाड़ियों ने आक्रामक खेल का प्रदर्शन करते हुए मध्यांतर से तीन मिनट पहले तीन गोल कर दिए रविकांत सिंह
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लगता है कि भारतीय टीम उस झटके को भूल गई है. एक तरह से यह ठीक भी है क्योंकि टीम में उत्साह जगाने का यह एक ज़रूरी कदम भी था.
टीम में निश्चित रूप से कुछ कमियाँ हैं जिन्हें दूर करने की ज़रूरत है. लेकिन कोच हरिंदर सिंह को अपनी क्षमता पर विश्वास है. ऐसा प्रतीत होता है कि उन्हें टीम की कमियाँ भी समझ में आ गई हैं और वे टीम को पटरी पर लाने के प्रयास में लगे हुए हैं.
भारतीय टीम दुनिया की नंबर एक टीम जर्मनी के साथ हुए मैंच में शुरुआती बढ़त लेने के बाद कुछ दबाव में दिख रही थी. खिलाड़ियों ने मिडफ़िल्ड में कुछ ख़राब खेल का प्रदर्शन किया. ऐसा भी लगने लगा था कि जर्मनी पर दबाव बनाने के लिए टीम के पास जैसे कोई योजना ही न हो.
रणनीति में बदलाव
मिडफ़िल्ड पर अब एक परिवर्तन दिख रहा है. अर्जुन हलप्पा के स्थान पर इग्नेस टिर्की खेल रहे हैं. यह 'क्विक थिंकिंग' यानी मैदान में परिस्थिति के मुताबिक रणनीति तत्काल बदलने की क्षमता इससे पहले भारतीय टीम में नज़र नहीं आती थी.
पंजाब गोल्ड कप हॉकी के पहले दौर के प्रदर्शन से भारतीय टीम का आत्मविश्वास बढ़ेगा और टीम आने वाले दिनों में मिलने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए और मज़बूत होगी.
इस प्रतियोगिता के बाद भारत को न्यूज़ीलैंड का दौरा करना है. उसके बाद मई में उसे मलेशिया में खेली जाने वाले सुल्तान अज़लान शाह कप की एक बड़ी चुनौती का सामना करना है.
आने वाले दिन भारतीय हॉकी टीम के लिए काफ़ी व्यस्त होंगे. यदि इस दौरान खिलाड़ियों को अदल-बदल कर खेलाया जाता है और वे स्वस्थ रहते हैं तो संभावना है कि भारत फिर दुनिया के मंच पर अपना परचम लहरा सके.