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भारत के मलयेशिया पर जीत और स्पेन से ड्रॉ के बाद पांच मैचों में चार अंक रहे, जिससे वह पांचवें स्थान पर है। भारत अब नौंवे-10वें स्थान के लिए खेलेगा। उसे ग्रुप बी में पांचवें स्थान पर रहने वाली टीम से भिड़ना होगा, जिसका फैसला आज होगा।
इसमें उसका सामना एशियाई चैंपियन दक्षिण कोरिया, जो अभी पांचवें स्थान पर है या दक्षिण अफ्रीका से हो सकता है। दक्षिण कोरिया की टीम मंगलवार को ओलंपिक चैंपियन जर्मनी से जबकि दक्षिण अफ्रीका की टीम अर्जेंटीना से भिड़ेगी।
दमदार रही पारी-
ऑस्ट्रेलिया ने अपनी मजबूत टीम के अनुरूप दबदबा बनाते हुए पहले 22 मिनट में ही चार गोल दाग दिये। लेकिन, इसके बाद भारतीय टीम ने खुद को एकजुट किया और मजबूत डिफेंस से विपक्षी टीम को कोई अन्य गोल नहीं करने दिया।
क्लेरेन गोवर्स ने ऑस्ट्रेलियाई टीम के लिए तीसरे मिनट में फील्ज गोल के जरिये खाता खोला. इसके बाद पेनल्टी कार्नर से तीन गोल हुए जिसमें क्रिस सिरिएलो ने दो जबकि जेरेमी हेवार्ड ने एक गोल दागा। ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी अपने कोच रिक चाल्र्सवर्थ को भेंट स्वरूप एक और खिताब देने की ओर बढ़ रहे हैं। यह उनके कोच का अंतिम विश्व कप होगा क्योंकि वह इस साल के अंत में रिटायर हो जायेंगे।
भारतीय टीम ने विपक्षी टीम के गोल में कुछ धावे तो बोले, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई टीम की रक्षापंक्ति इतनी मजबूत और एकजुट थी कि उनके स्ट्राइकरों को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। ऑस्ट्रेलिया ने भारतीय डिफेंस पर दबाव डालते हुए शुरू में ही गोल दिया।
दो स्ट्राइकरों ने भारतीय सर्कल के ऊपर डिफेंडर वीआर रघुनाथ को चौंकाते हुए उनसे गेंद छीन ली और तीसरे ही मिनट में इसे भारतीय गोल में पहुंचा दिया। साइमन ओर्चाड ने सर्कल से ड्रिबल करते हुए गोवर्स को क्रॉस दिया जिन्होंने आराम से गोल दागा।
भारत 10वें मिनट में पहली बार विपक्षी सर्कल के पास पहुंचा लेकिन चिंगलेनसाना सिंह इस मौके को गंवा बैठे और यह मौका चूक गया। ऑस्ट्रेलिया ने फिर तीन लगातार पेनाल्टी कॉर्नर को गोल में तब्दील करते हुए पहले हाफ में 4-0 की बढत ले ली। हालांकि मुकाबला शुरु से अंत तक बेहद रोमांचक व एकतरफा रहा।