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जिसने दिखाई ओलंपिक की राह, अब वहीं बना हॉकी टीम का कप्तान, जानें कौन हैं पीआर श्रीजेश

नयी दिल्ली। हॉकी इंडिया ने रियो ओलिंपिक के लिए पुरुष और महिला हॉकी टीम की घोषणा कर दी। जहां महिला टीम की कप्तानी सुशीला चानू को दी गई तो वहीं पुरूष हॉकी में भी बड़ा फेरबदल करते हुए सरदार सिंह की जगह पीआर श्रीजेश को कप्तान बनाया गया। हॉकी इंडिया ने रियो ओलिंपिक के लिए गोलकीपर पीआर श्रीजेश को भारतीय हॉकी टीम का कप्‍तान नियुक्‍त किया है। माना जा रहा है कि चैंपियंस ट्रॉफी में टीम इंडिया के शानदार प्रदर्शन के इनाम के तौर पर श्रीजेश को रियो ओलंपिक में टीम की कप्तानी दी गई है। क्यों ओलंपिक इंडियन हॉकी टीम के कैैप्टन सरदार सिंह नहीं?

जानें कौन है पीआर श्रीजेश?

पीआर श्रीजेश का जन्म 8 मई 1986 को केरल के अर्नाकुलम जिले के किज्हक्काम्बलम के छोटे से गांव में हुआ। उनके पिता का नाम पीआर रविंद्रन और माता का नाम ऊषा है। उनके पिता एक साधारण किसान है। श्रीजेश की प्रारंभिक शिक्षा वहीं गांव के स्कूल में हुई। शुरुआत से ही श्रीजेश को खेलों से बड़ा लगाव था। हॉकी गोलकीपर बनने के पहले उन्‍होंने एथलेटिक्‍स और वॉलीबॉल जैसे खेलों में भी हाथ आजमाया। 12 साल की उम्र में ही श्रीजेश को त्रिवनंतपुरम के जीवी राजा स्पोर्टस स्कूल में दाखिला मिल गया। लेकिन उनके खेल में उस वक्त निखार आया जब उन्हें हॉकी कोच जया कुमार और कोलप्पा ने हॉकी के लिए चुना। उन्होंने स्कूल लेवर और नेहरु कप जैसे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किए।

इंटरनेशनल करियर

साल 2004 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पर्थ में खेले गए मैच में श्रीजेश ने जूनियर टीम का हिस्सा बनकर इंटरनेशनल लेवल पर अपनी एंट्री की। साल 2006 में उन्हें सीनियर टीम में जगह मिल गई। वो कोलंबों में खेले गए साउथ एशिया गेमों में भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा बनें। साल 2008 में खेले गए जूनियर एशिया कप में उन्हें बेस्ट गोलकीपर के खिताब से नवाजा गया।

खास बातें

28 साल के श्रीजेश टीम इंडिया के न सिर्फ नंबर वन गोलकीपर हैं बल्कि उनका गोल क्षेत्र पर मौजूद रहना टीम के खिलाडि़यों को अलग ही आत्‍मविश्‍वास भर देता है। साल 2004 में जूनियर नेशनल टीम में जगह बनाने के बाद उन्‍हें सीनियर टीम में जगह बनाने के लिए ज्‍यादा लंबा इंतजार नहीं करना पड़ा। साल 2006 में वे सीनियर टीम के सदस्‍य बन गए। अप ने खेल के दम पर उन्होंने अपनी अगल पहचान बनाई. वो लंदन ओलिंपिक और हॉकी वर्ल्‍डकप में भी वे भारतीय टीम का प्रतिनिधित्‍व कर चुके हैं।

रियो ओलंपिक में दिलाई जगह

भारतीय टीम को रियो ओलिंपिक में प्रवेश दिलाने में भी सबसे बड़ा योगदान श्रीजेश का ही रहा है। साल 2014 में दक्षिण कोरिया में हुए एशियाई खेलों में श्रीजेश ने अपने प्रदर्शन से भारत को पाकिस्तान के खिलाफ खिताबी जीत दिलाई। उनके इसी प्रदर्शन से न केवल टीम इंडिया जीती बल्कि इसी जीत ने 2016 ओलिंपिक में प्रवेश का रास्‍ता साफ कर दिया।

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:16 [IST]
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