पीसीबी ने बुधवार सुबह जारी अपने बयान में कहा था कि खराब खेल और अनुशासनहीनता के कारण यूनुस और यूसुफ सहित पांच अन्य खिलाड़ियों पर प्रतिबंध और जुर्माना लगाया जा रहा है। पीसीबी के बयान में यूसुफ और यूनुस पर आजीवन प्रतिबंध लगाए जाने का जिक्र था।
पीसीबी प्रमुख बट्ट अब इन बातों को झूठा करार दे रहे हैं। बट्ट ने कहा कि आस्ट्रेलिया में खराब प्रदर्शन के कारणों का पता लगाने के लिए गठित जांच समिति द्वारा पेश की गई रिपोर्ट पर विचार करने के बाद पीसीबी ने वरिष्ठ खिलाड़ियों की सजा में कमी करने का फैसला किया।
बुधवार शाम को ही पीसीबी ने इस संबंध में एक सफाईनामा भी जारी किया। पीसीबी के बयान के मुताबिक, "यूसुफ और यूनुस पर आजीवन प्रतिबंध लगाने संबंधी जांच समिति की अनुशंसाओं को कुछ खबरिया चैनलों ने गलत तरीके से ले लिया। इसके बाद यही खबर आम हो गई। पीसीबी साफ करना चाहता है कि यूसुफ और यूनुस पर आजीवन प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। पीसीबी को जरूरत महसूस हुई तो वह चयन के लिए इन खिलाड़ियों के नामों पर विचार करेगा।"
हैरानी की बात यह है कि पीसीबी का यह बयान उसके उस बयान से चार घंटे के बाद आया है, जिसमें उसने साफ-साफ कहा था कि यूनुस और यूसुफ पर आजीवन प्रतिबंध लगाया जा रहा है। आगे से वे अंतर्राष्ट्रीय मैचों में नहीं बल्कि काउंटी और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओ में ही खेल सकेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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