नई दिल्ली, 11 जनवरी (आईएएनएस)। 'मिस्टर भरोसेमंद', 'द वॉल' और 'मिस्टर कूल' जैसे न जाने कितने विशेषणों से नवाजे जा चुके भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान राहुल शरद द्रविड़ रविवार को 35 साल के हो गए।
20 जनवरी, 1996 को इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में 95 रनों की नायाब पारी के साथ अपने टेस्ट करियर का आगाज करने वाले द्रविड़ का जन्म 11 जनवरी, 1973 को मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में हुआ था।
भारत की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के अलावा स्कॉटलैंड, एशिया एकादश, बेंगलुरू रॉयल चैलेंजर्स, आईसीसी विश्व एकादश, कर्नाटक और केंट की टीमों के लिए खेल चुके द्रविड़ विश्व क्रिकेट के उन चुनिंदा बल्लेबाजों में से एक हैं, जिन्होंने टेस्ट तथा एकदिवसीय मैचों में 10,000 रन बनाने का कारनामा किया है।
भारत में सिर्फ तीन बल्लेबाज ही ऐसे हैं, जिन्होंने टेस्ट मैचों में दस हजार रनों का आंकड़ा पार किया है। इनमें द्रविड़ भी एक हैं। सचिन तेंदुलकर और सुनील गावस्कर इस सूची में पहले और दूसरे क्रम पर हैं।
14 फरवरी, 2007 को द्रविड़ एकदिवसीय मैचों में 10 हजार रन बनाने वाले बल्लेबाज बने। दुनिया में सिर्फ छह ऐसे बल्लेबाज हुए हैं, जिन्होंने यह मुकाम हासिल किया है। भारत के सचिन और सौरव गांगुली भी इनमें शामिल हैं।
द्रविड़ ने 131 टेस्ट मैचों में 52.28 के औसत से 10509 रन बनाए हैं। इसमें 26 शतक और 53 अर्धशतक शामिल हैं। शतक लगाने के मामले में द्रविड़ भारत के तीसरे सबसे सफल बल्लेबाज हैं। उनसे ऊपर सचिन और गावस्कर हैं। टेस्ट मैचों में द्रविड़ ने 180 कैच भी लपके हैं। उनका सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर 270 रन रहा है।
एकदिवसीय मैचों में भी द्रविड़ का बल्ला खुलकर बोला है। 3 अप्रैल, 1996 में श्रीलंका के खिलाफ सिंगापुर में अपना करियर शुरू करने वाले द्रविड़ ने अब तक 333 मैच खेलते हुए 10585 रन बटोरे हैं। उनके नाम 12 शतक और 81 अर्धशतक हैं। उनका सर्वोच्च स्कोर 153 रन रहा है। साथ ही उन्होंने 193 कैच भी लपके हैं। यही नहीं विकेटकीपिंग करते हुए द्रविड़ ने एकदिवसीय मैचों में 14 स्टंपिंग भी किए हैं।
द्रविड़ को तकनीकी तौर पर विश्व के सबसे दक्ष बल्लेबाजों में एक माना जाता है। नंबर-तीन पर बल्लेबाजी करते हुए द्रविड़ ने आस्ट्रेलिया के सर डॉन ब्रैडमैन के बाद सर्वाधिक औसत से रन बटोरे हैं। इस क्रम पर खेलते हुए द्रविड़ ने 60 रन प्रति मैच के औसत से रन बटोरे हैं।
जन्मदिन के अवसर पर द्रविड़ को उस समय एक खुशखबरी सुनने को मिली, जब उन्हें इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के दूसरे संस्करण के लिए लगातार दूसरे साल बेंगलुरू रॉयल चैलेंजर्स टीम का कप्तान नियुक्त किया गया।
द्रविड़ को वर्ष 2005 में भारतीय एकदिवसीय टीम का कप्तान नियुक्त किया गया था। कप्तान के रूप में अपनी पहली श्रंखला में ही उन्होंने भारतीय टीम को श्रीलंका पर 6-1 की जीत दिलाई। इसके बाद उन्हें टेस्ट टीम की भी कमान सौंप दी गई। हालांकि कप्तान के तौर पर द्रविड़ भारतीय टीम को 2007 विश्व कप में सफलता नहीं दिला पाए। भारतीय टीम पहले दौर में ही बाहर हो गई थी।
टेस्ट मैचों में द्रविड़ की कप्तानी में भारतीय टीम ने दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज में ऐतिहासिक जीत दर्ज की। हालांकि इस दौरान उनके व्यक्तिगत प्रदर्शन का ग्राफ लगातार गिरता गया। इसी को ध्यान में रखते हुए द्रविड़ ने 2007 के इंग्लैंड दौरे से पहले कप्तानी छोड़ दी। हालांकि इसके बाद भी उनका व्यक्तिगत प्रदर्शन सुधर नहीं सका और हाल ही में आस्ट्रेलिया तथा इंग्लैंड के साथ खेली गई टेस्ट श्रंखलाओं में वे बुरी तरह फ्लॉप रहे।
खराब फार्म से उबरने के लिए द्रविड़ ने घरेलू क्रिकेट का रुख किया और रणजी मैचों में अपनी घरेलू टीम कर्नाटक के लिए खेलते हुए एक दोहरे शतक सहित दो शतक लगाए। अब उनका लक्ष्य न्यूजीलैंड के साथ खेली जाने वाली टेस्ट तथा एकदिवसीय श्रंखला के लिए भारतीय टीम में जगह पाना है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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