नई दिल्ली, 16 जनवरी (आईएएनएस)। भारत की राष्ट्रीय हॉकी टीम के कोच पद के सबसे बड़े उम्मीदवार स्पेन के जोस ब्रासा का मानना है कि भारतीय खिलाड़ी तकनीक के आधार पर नहीं बल्कि दमखम के आधार पर यूरोपीय खिलाड़ियों से पिछड़ रहे हैं।
ब्रासा के मुताबिक भारत में अधिक से अधिक सिंथेटिक (कृत्रिम) मैदान तैयार किए जाने की जरूरत है क्योंकि घास के मैदानों पर खेलने के कारण उनकी क्षमता काफी हद तक प्रभावित हो रही है।
ब्रासा ने कहा कि दमखम की कमी के कारण भारतीय खिलाड़ी पूरे 70 मिनट तक अपने खेल पर नियंत्रण नहीं रख पाते हैं और यही कारण है कि खेल के अंतिम समय में टीम एक के बाद एक गोल खाकर मैच हार जाती है।
कोच पद के उम्मीदवार ने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों को अपनी स्टेमिना (दमखम) बढ़ानी होगी, जिससे कि वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दूसरी टीमों का अंतिम समय तक पूरे जोश के साथ सामना कर सकें।
ब्रासा ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा, "घास के मैदानों के लिहाज से भारतीयों की तकनीक उपयुक्त है लेकिन सिंथेटिक मैदान पर वे जल्दी थक जाते हैं। इसका कारण यह है कि सिंथेटिक मैदान पर खेल में गति ज्यादा होती है। भारतीय खिलाड़ियों को चिकित्सकीय परीक्षण से गुजरना होगा। यह देखना जरूरी है कि उनका दमखम बढ़ाने के लिए क्या करने की जरूरत है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।