दूसरी ओर, हॉलैंड की टीम ने इस टूर्नामेंट में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। उसने अपने आखिरी ग्रुप मैच में ओलंपिक चैंपियन जर्मनी को 7-1 से रौंदकर फाइनल में खेलने का अधिकार हासिल किया है। खास बात यह है कि उसने टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं गंवाया है।
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि हॉलैंड की टीम अब यहां के माहौल में पूरी तरह ढल चुकी है। इससे पहले भारत के साथ जो लीग मैच खेले गए थे, उस दौरान वह माहौल में ढल नहीं सकी थी और इसी का फायदा उठाकर भारत ने उसे पहले मुकाबले में 4-4 और दूसरे मुकाबले में 2-2 की बराबरी पर रोक दिया था।
हॉलैंड के कोच माइकल ह्यूवेल ने खिताबी मुकाबले की पूर्व संध्या पर कहा, "मेरी टीम अब भारतीय माहौल में ढल चुकी है। जर्मनी पर मिली बड़ी जीत ने हमारा मनोबल बढ़ा दिया है। हम एक रोमांचक खिताबी मुकाबले की आशा कर रहे हैं।"
भारतीय टीम ने इस टूर्नामेंट में एक मैच गंवाया है। शुक्रवार को खेले गए लीग मैच में जर्मनी ने उसे 4-2 से पराजित किया था। इस हार ने भारत की स्थिति कमजोर कर दी थी लेकिन इसके बाद भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड को 3-2 से हराकर फाइनल के लिए स्थान सुरक्षित कर लिया।
भारत के लिए एक और चिंता का विषय है। न्यूजीलैंड के खिलाफ उसकी रक्षापंक्ति की कलई खुलती दिखी थी। इसी कारण उसे आठ पेनाल्टी कार्नरों का सामना करना पड़ा था। यह अलग बात है कि न्यूजीलैंड की टीम उसमें से एक को भी गोल में नहीं बदल सकी थी।
भारतीय कोच हरेंद्र सिंह ने कहा, "न्यूजीलैंड के खिलाफ हमारी कई खामियां उजागर हुई थीं। हमने उन्हें पहचान लिया है। हम अपनी रक्षापंक्ति को मजबूत करने की कोशिश करेंगे।"
उन्होंने कहा, "हमारी कोशिश कम से कम पेनाल्टी कार्नर देने की होगी। हमारे लिए खुशी की बात यह है कि गोल करने के लिए हम पेनाल्टी कार्नर पर आश्रित नहीं हैं। हमने इस टूर्नामेंट में सबसे अधिक फील्ड गोल किए हैं। मैं यूरोपीय चैंपियन के साथ कांटे के मुकाबले की उम्मीद कर रहा हूं। हॉकी की दशा सुधारने के लिए हमें खिताबी जीत की सख्त दरकार है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।