स्थानीय समाचार पत्र 'द नेशन' के मुताबिक कराची प्रेस क्लब में शनिवार को संवाददाताओं से बातचीत करते हुए यूसुफ ने जरदारी से आग्रह किया कि वह इस पूरे मामले में हस्तक्षेप करें और उनके साथ हुई नाइंसाफी पर गौर करें।
पाकिस्तानी टीम की रीढ़ कहे जाने वाले यूसुफ ने इस बात से इंकार किया कि उन्होंने इंडियन क्रिकेट लीग (आईसीएल) से नाता तोड़ने के लिए पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) से एक करोड़ पाकिस्तानी रुपये लिए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें अब तक जो भी मिला है वह सब पाकिस्तान की बदौलत मिला है ऐसे में वह अपने मुल्क के हितों के खिलाफ काम नहीं कर सकते।
यूसुफ ने कहा कि उन्होंने आईसीएल के साथ खेलकर कोई अपराध नहीं किया है। क्रिकेटर पहले भी कैरी पैकर्स सीरीज और काउंटी क्रिकेट में खेलते रहे हैं। एक पेशेवर क्रिकेटर को जब भी कोई मौका मिलता है तो उसे वह पकड़ लेता है।
उन्होंने कहा, "मैं अपना क्रिकेट से जुड़ा भविष्य पाकिस्तान के लोगों के हाथ में छोड़ता हूं। अगर मैंने जाने अनजाने में कोई गलती की होगी तो उसके लिए पाकिस्तान के लोगों से माफी मांगने को तैयार हूं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।