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मोदी ने हार स्वीकारी, दीक्षित ने भष्टाचार खत्म करने का किया ऐलान (लीड-2)

By Staff

जयपुर/नई दिल्ली, 1 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के उपाध्यक्ष और इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के अध्यक्ष ललित मोदी ने यह कहते हुए राजस्थान क्रिकेट संघ (आरसीए) अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनावों में अपनी और अपने समर्थकों की हार स्वीकार कर ली है कि उन्हें वसुंधरा राजे से नजदीकी रखने का खामियाजा भुगतना पड़ा है।

दूसरी ओर, मोदी पर पांच मतों के अंतर से जीत हासिल करने वाले राजस्थान सरकार के बागवानी विभाग के सचिव संजय दीक्षित ने साफ शब्दों में कहा कि उनका प्रमुख लक्ष्य मोदी के कार्यकाल के दौरान पनपे भष्टाचार को खत्म करना होगा।

रविवार को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त विशेष पर्यवेक्षक की देखरेख में हुए मतदान में मोदी को कुल 13 वोट मिले जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी दीक्षित को 18 वोट मिले। इस तरह पांच वोट के अंतर से हारकर मोदी आरसीए की कार्यकारिणी से बाहर हो गए।

मोदी की हार बीसीसीआई के लिए भी बड़ा झटका है। आरसीए के विभिन्न पदों पर भी मोदी समर्थकों की हार हुई है। उनकी पैनल का कोई भी सदस्य जीत नहीं सका है। इस हार के बाद आने वाले दिनों में मोदी को और समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

इस हार से मोदी के बीसीसीआई उपाध्यक्ष बने रहने पर कोई आंच नहीं आएगी क्योंकि वह आरसीए के अलावा पंजाब क्रिकेट संघ (पीसीए) से भी जुड़े हुए हैं। उन्होंने पत्रकारों से कहा, "मैं अपनी हार स्वीकार करता हूं। ऐसा लगता है कि मुझे वसुंधरा सरकार के साथ नजदीकी रखने का खामियाजा भुगतना पड़ा है। राज्य सरकार ने मुझे हराने के लिए अपनी पूरी शक्ति झोंक दी। इससे जयपुर में होने वाले आईपीएल मैचों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मैच यहीं होंगे।"

बतौर आरसीए अध्यक्ष अपने पहले संबोधन में दीक्षित ने कहा, "मेरा प्रमुख लक्ष्य मोदी के कार्यकाल के दौरान जड़ पकड़ चुके भ्रष्टाचार को खत्म करना है। मैं इस जीत के लिए आरसीए के सदस्यों के साथ-साथ राज्य की जनता को भी धन्यवाद देता हूं।"

हार की आशंका में मोदी ने कई बार चुनाव टलवाने की कोशिश की थी। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि उन्हें चुनाव के दौरान धांधली की आशंका है। मोदी की याचिका पर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव को एक सप्ताह के लिए स्थगित करने का आदेश पारित किया था। यह चुनाव पहले 22 फरवरी को होना था लेकिन न्यायालय के आदेश के बाद इसे एक मार्च को कराया गया।

अपने फैसले के दौरान प्रधान न्यायाधीश के.जी. बालाकृष्णन और न्यायाधीश पी. सथाशिवम की दो सदस्यीय खंडपीठ ने चुनाव के लिए उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एन.एम. कासलीवाल को पर्यवेक्षक नियुक्त किया था। न्यायालय ने कहा था कि चुनाव 11 फरवरी, 2005 से लागू आरसीए के संशोधित संविधान के अनुसार ही कराए जाएंगे।

दरअसल, मोदी के लिए यह साल अच्छा नहीं रहा है। उनके खिलाफ आईपीएल कोष में छह करोड़ रुपये की धांधली और राजस्थान में एक जमीन कब्जाने का मामला दर्ज है। जयपुर स्थित एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ने मोदी पर आईपीएल कोष में हेराफेरी का आरोप लगाते हुए पुलिस में एक प्राथमिकी दर्ज कराई है।

संगठन ने पिछले महीने ज्योति नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। नागरिक मोर्चा नाम के एक एनजीओ ने आईपीसी की धारा-420 और 467 के अंतर्गत मोदी पर बेइमानी और धोखाधड़ी का आरोप लगाया। संगठन के मुताबिक 13 मई, 2008 को जयपुर में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के बाद मोदी ने आईपीएल खाते में से बतौर मुआवजा पीड़ितों को 6 करोड़ रुपये देने की बात कही थी। मोदी ने यह रकम मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा कराने की बात कही थी लेकिन आज तक यह रकम पीड़ितों तक नहीं पहुंच सकी है।

मोदी को वसुंधरा सरकार का करीबी माना जाता था। इन दिनों वह धोखाधड़ी के एक अन्य आरोप में भी उलझे हुए हैं। उन पर राजस्थान के नागौर जिले में एक जमीन की खरीद-फरोख्त को लेकर गबन का आरोप है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:21 [IST]
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