भारत को एकल मैचों के माध्यम से शुरुआती बढ़त दिलाने की जिम्मेदारी सोमदेव देववर्मन और रोहन बोपन्ना पर होगी। इन दो खिलाड़ियों की इस बात का भरोसा होगा कि अगर वे अपना-अपना एकल मैच जीत जाते हैं तो लिएंडर पेस और महेश भूपति की अनुभवी जोड़ी युगल मैच जीतकर अपनी टीम को अजेय बढ़त दिला देंगे।
अगर भारत को एकल मुकाबलों में जीत हासिल करनी है तो उसे शुक्रवार को खेले जाने वाले दूसरे मुकाबले पर ध्यान केंद्रित करना होगा क्योंकि इस मैच में लू येन ह्सुन भारतीय टीम के सामने होंगे।
ह्सुन विश्व के 59वीं वरीयता प्राप्त खिलाड़ी हैं और उन्होंने इस साल आस्ट्रेलियन ओपन में विश्व के 12वीं वरीयता प्राप्त अर्जेटीनी खिलाड़ी डेविड नलबैंडियन को हराकर सनसनी फैला दी थी।
भारत के लिए अच्छी खबर यह है कि बोपन्ना एक बार ह्सुन को हरा चुके हैं। 2006 में दोहा में खेले गए एशियाई खेलों के दौरान बोपन्ना ने ह्सुन पर जीत दर्ज की थी।
भारत के लिए युगल मुकाबलों में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए क्योंकि पेस और भूपति शानदार फार्म में हैं। इस सप्ताह दोनों ने अपनी रैंकिंग भी सुधारी है और इस लिहाज से भारत का कम से कम यह मैच जीतना तो तय है।
भारतीय टीम पिछले साल वर्ष 2005 के बाद पहली बार वर्ल्ड ग्रुप में पहुंची थी। हालांकि रोमानिया के हाथों हारने के बाद वह फिर से क्षेत्रीय ग्रुप में खिसक गई थी।
चीनी ताइपे के खिलाफ जीत हासिल करने की सूरत में भारतीय टीम को अपने घर में आस्ट्रेलिया का सामना करना होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।