भारतीय टीम पिछले साल वर्ल्ड ग्रुप में पहुंची थी लेकिन रोमानिया से मिली हार के कारण उसे फिर से एशिया ओसेनिया ग्रुप में लौटना पड़ा। भारतीय टीम 2005 में भी वर्ल्ड ग्रुप प्ले ऑफ दौर में पहुंची थी।
रविवार को खेले गए दूसरे उलट एकल (रिवर्स सिंगल) मुकाबले में हालांकि रोहन बोपन्ना मेजबान टीम के यांग त्सूंग ह्वा के हाथों 3-6, 7-6 (6), 6-7 (5) से हार गए लेकिन इसी दिन खेले गए पहले रिवर्स सिंगल मुकाबले में देश के सर्वोच्च वरीयता प्राप्त एकल खिलाड़ी सोमदेव ने लू येन ह्सूंग को 6-1, 6-2, 6-3 से हराकर भारतीय टीम को 3-1 की अजेय बढ़त दिला दी।
शुक्रवार को पहले दिन दो एकल मुकाबले हुए थे, जिसमें दोनों टीमों ने एक-एक मैच जीता था। पहले दिन स्कोर 1-1 से बराबर रहा था, लेकिन दूसरे दिन महेश भूपति और लिएंडर पेस ने युगल मुकाबला जीतकर अपनी टीम को 2-1 से बढ़त दिला दी थी।
सोमदेव ने शुक्रवार को पहला एकल मुकाबला जीतकर अपनी टीम को 1-0 की बढ़त दिलाई थी लेकिन दूसरे एकल मुकाबले में बोपन्ना की हार के साथ स्कोर 1-1 हो गया था। सोमदेव ने ती चेन को 7-5, 6-4, 6-4 से पराजित किया था लेकिन बोपन्ना मेजबान टीम के शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ी लू येन ह्सूंग के हाथों 6-7, 2-6, 2-6 से हार गए थे।
दूसरे दिन शनिवार को टीम को बढ़त दिलाने का दारोमदार पेस और भूपति के कंधे पर था। दोनोंे खिलाड़ी सालों से ऐसा करते आ रहे हैं। अनुभव और मौजूदा फार्म के दम पर उन्होंने एक बार फिर ऐसा कर दिखाया और अपनी टीम को 2-1 की बढ़त दिला दी थी।
रविवार को पहले उलट एकल मुकाबले में लू का सामना सोमदेव से होना था। वहीं इसी दिन खेले जाने वाले दूसरे उलट एकल मुकाबले में यांग त्सूंग ह्वा को बोपन्ना के साथ दो-दो हाथ करना था। टीम प्रबंधन ने चेन की जगह ह्वा को उलट एकल मैच में उतारने का फैसला किया।
सोमदेव के लिए लू को हराना आसान नहीं था क्योंकि बेहतरीन फार्म चल रहे लू ने आस्ट्रेलियन ओपन में विश्व के 12वीं वरीयता प्राप्त अर्जेटीनी खिलाड़ी डेविड नलबैंडियन को हराया था। सोमदेव के लिए लू की चुनौती कठिन नहीं रही और उन्होंने यह मैच जीतकर अपनी टीम को अजेय बढ़त दिला दी।
दूसरी ओर, बोपन्ना को ह्वा की चुनौती रास नहीं आई और वह यह मैच हार गए। बोपन्ना अपने दोनों मैच हारे। इस लिहाज से भारत को तीसरे दौर में पहुंचाने का पूरा श्रेय सोमदेव को जाता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।