रविवार को खेले गए पहले मुकाबले में मिस्र ने उसे 2-2 की बराबरी पर रोक दिया था। तालिका में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए भारत को मेजबान टीम के साथ होने वाले मैच को जीतना जरूरी होगा।
पहली बार इस टूर्नामेंट में हिस्सा ले रही मिस्र की टीम के खिलाफ भारतीय टीम की अंतिम समय की कमजोरी के कारण मैच ड्रॉ हो गया। मैच के अंतिम क्षणों में भारतीय टीम अक्सर बढ़त गंवा देती है।
वैसे भारतीय टीम का प्रदर्शन आशा के अनुरूप नहीं रहा। भारतीय टीम के कोच हरेंद्र सिंह ने स्वीकार किया कि उनकी टीम ने पुरानी गलतियों को अब तक नहीं सुधारा है।
मलेशिया के खिलाफ भारतीय टीम को अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी, क्योंकि वह अपने पहले मैच में पाकिस्तान को 3-2 से पराजित कर चुका है।
वैसे तो 1986 के बाद से मलेशिया की पाकिस्तान पर यह पहली जीत है लेकिन मेजबान टीम का अच्छा खेलना भारत के लिए खतरनाक हो सकता है।
पाकिस्तान पर मलेशिया की जीत हरेंद्र को अपनी रणनीति बदलने को मजबूर करेगी क्योंकि उनकी नजर में पाकिस्तान और न्यूजीलैंड ही ऐसी टीमें हैं, जिनके खिलाफ वह सावधानी बरतने की बात करते रहे हैं।
बुधवार को भारत की अग्रिम पंक्ति को अपने खेल पर ध्यान देना होगा क्योंकि मिस्र के खिलाफ उन्होंने कुछ ऐसे मौके गंवाए थे, जिन्हें अगर गोल में बदल दिया गया होता तो अंतिम समय में गोल खाने के बावजूद जीत तय थी।
इसके अलावा रक्षा पंक्ति को बेहतर तालमेल के लिए प्रयास करना होगा। मिस्र के खिलाफ अंतिम समय में जो गोल हुआ था, वह निश्चित तौर पर तालमेल की कमी का नजीता था।
भारतीय टीम ने हाल के दिनों में पेनाल्टी कार्नर के जरिए गोल करने का तो खूब अभ्यास किया है लेकिन पेनाल्टी कार्नर को रोकने के लिए उस स्तर तक प्रयास नहीं किया गया है, जिसके जरिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जीत हासिल की जा सकती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।