आस्ट्रेलिया की ओर से शनिवार को की गई इस घोषणा से उसकी टीम को डेविस कप से एक साल के लिए निलंबित किया जा सकता है और उसे 100,000 डॉलर का जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।
टीए ने अंतर्राष्ट्रीय टेनिस संघ (आईटीएफ) बोर्ड से अपील की थी कि डेविस मुकाबला भारत से बाहर कराया जाए लेकिन बोर्ड ने उसकी अपील खारिज कर दी थी।
टीए के अध्यक्ष ज्योफ पोलार्ड ने एक बयान जारी कर कहा, "हमने डेविस कप को भारत से बाहर कराने का अनुरोध किया था क्योंकि वहां हम विशेषत: चुनाव के समय अपने खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित थे।"
उन्होंने कहा, "आईटीएफ के फैसले से हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचा है। हम अपनी टीम नहीं भेज सकते। जोखिम वाली जगहों पर अपने खिलाडियों को भेजना गैरजिम्मेदारी भरा कदम होगा।"
आस्ट्रेलिया की डेविस कप टीम के कप्तान जॉन फिट्जगेराल्ड ने कहा, "आईटीएफ का फैसला गैर जिम्मेदाराना है। निश्चित तौर पर खिलाड़ियों की सुरक्षा पर भी गौर करना चाहिए था।"
उधर, एआईटीए के महासचिव अनिल खन्ना ने कहा, "आईटीएफ का निर्णय उम्मीदों के मुताबिक रहा और यह स्वागत योग्य है। मुकाबले के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे और इसको लेकर आशंका की कोई जरूरत नहीं थी।"
इस बीच खेल मंत्री एम. एस. गिल का कहा कि उन्होंने टीए को पूरी सुरक्षा का भरोसा दिलाया था। गिल ने एक बयान जारी कर कहा, "मुझे खेद है कि टीए अपनी टीम चेन्नई नहीं भेजेगा। मैं मार्च महीने में आस्ट्रेलिया के राष्ट्रमंडल खेल और ओलंपिक से जुड़े लोगों से मिलने मेलबर्न और सिडनी गया था। मैंने वहां सभी वरिष्ठ लोगों से बातचीत की थी। ऐसे में आस्ट्रेलिया का चेन्नई में न खेलने के फैसले का कोई औचित्य नहीं हो सकता।"
उन्होंने कहा, "हम सुरक्षा चिंताओं के प्रति पूरी तरह सचेत हैं। केंद्र और राज्य सरकार ने उन्हें पूरी सुरक्षा का भरोसा दिलाया था। आजादी के बाद से हमारे यहां सभी खेल आयोजन बिना किसी अप्रिय घटना के संपन्न हुए हैं। हमारे भरोसे को आईटीएफ ने भी संतोषजनक पाया है।"
भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन (आईओए) ने कहा कि आस्ट्रेलिया के इस निर्णय से दिल्ली में वर्ष 2010 में आयोजित होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों पर असर नहीं पड़ेगा। आईओए ने अंतर्राष्ट्रीय टेनिस फेडरेशन (आईटीएफ) से टेनिस आस्ट्रेलिया (टीए) के खिलाफ कड़े कदम उठाने की अपील करने कहा।
आईओए के महासचिव रणधीर सिंह ने शनिवार को आईएएनएस से कहा कि आईटीएफ ने आयोजन स्थल को सुरक्षित घोषित किया था और आस्ट्रेलिया को इसका पालन करना चाहिए। इस गैर जिम्मेदाराना निर्णय के लिए आईटीएफ को आस्ट्रेलिया पर भारी जुर्माना लगाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आस्ट्रेलिया ने राष्ट्रमंडल 2010 के संबंध में भी ऐसी ही चिंताएं जताई थीं लेकिन अब वह सुरक्षा स्थिति को लेकर संतुष्ट हैं।
एशियाई ओलंपिक परिषद (ओसीए) के भी महासचिव रणधीर सिंह ने विश्वास जताया कि आस्ट्रेलिया के निर्णय से राष्ट्रमंडल खेलों से पहले आयोजित होने वाली अन्य बड़ी खेल प्रतियोगिताओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रमंडल खेलों से पहले भारत बैडमिंटन विश्व कप (2009), हाकी विश्व कप और एएफसी चैलेंज कप का आयोजन करने वाला है।
रणधीर सिंह ने कहा कि ओसीए के अध्यक्ष शेख अहमद अली शहाब दो दिन पहले दिल्ली में थे और उन्होंने 2018 में भारत के एशियाई खेल आयोजित करने के दावे का समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान को एक साथ नहीं जोड़ा जा सकता। यदि यह बात है तब तो पूरी दुनिया में सुरक्षा की समस्या है।
उधर, टेनिस आस्ट्रेलिया (टीए) के इस फैसले पर तमिलनाडु टेनिस संघ (टीएनटीए) ने चिंता जाहिर की है। टीएनटीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हितेश जोशी ने आईएएनएस से कहा, "हम वाकई बहुत चिंतित हैं। हम इस मुकाबले के आयोजन की तैयारियों में लगे थे और तैयारियां अंतिम दौर में थीं। हम आयोजन की प्रतीक्षा में थे।"
उन्होंने कहा कि वह टीए के उस मत से असहमत हैं कि यहां उनके खिलाड़ियों को खतरा है। जोशी ने कहा कि इसी साल जनवरी में चेन्नई ओपन का आयोजन सफलतापूर्वक किया गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।