जोहांसबर्ग, 18 मई (आईएएनएस)। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का दूसरा संस्करण न सिर्फ विज्ञापन कंपनियों और आयोजन समिति के लिए फायदे का सौदा साबित हो रहा है बल्कि इसके कारण दक्षिण अफ्रीका के सैकड़ों बेरोजगार युवाओं को कम मिल गया है।
37 दिनों तक चलने वाले इस ट्वेंटी-20 टूर्नामेंट ने न सिर्फ स्थानीय युवाओं को रोजगार दिया है बल्कि उन्हें अपराध की तरफ जाने से भी रोका है। मोजेज, लुकास और वार्नर जैसे स्थानीय युवा आईपीएल के अपने लिए एक सौगात की तरह देखते हैं।
मोजेज जहां एक पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनी में अस्थायी तौर पर काम करते हैं वहीं लुकास वांडर्स स्टेडियम में हॉट-डॉग बेचते हैं। उनकी भी नौकरी अस्थायी है। वार्नर को वांडर्स स्टेडियम के एक हिस्से की रखवाली करने का काम मिला है।
23 साल के मोजेज ने आईएएनएस को बताया, "हम पूरे साल काम के लिए भटकते रहते हैं लेकिन आईपीएल ने हमें काम दिला दिया है। मैं 37 दिनों में 1000 रैंड्स कमा लूंगा। यह रकम बहुत बड़ी नहीं है लेकिन इससे मेरा काम चल जाएगा लेकिन हमें चिंता है कि आईपीएल के बाद क्या होगा।"
सिर्फ मोजेज ही नौकरी जाने की चिंता के ग्रसित नहीं हैं। लुकास को भी इस बात का अहसास है कि 37 दिनों का जश्न खत्म होने के बाद उनके पास काम नहीं रहेगा।
लुकास कहते हैं, "मैं हॉट-डॉग बेचकर रोजाना 250 रैंड्स कमा लेता हूं। यह रोजाना किसी अपराध के लिए जेल जाने से तो काफी अच्छा है। मैं नहीं जानता कि आईपीएल के खत्म होने के बाद क्या होगा। हमारे लिए नौकरी खोज पाना काफी मुश्किल होगा। कितना अच्छो होता कि आईपीएल पूरे साल खेला जाता। इससे हमारी जिंदगी संवर जाती।"
लुकास और मोजेज की तुलना में वार्नर काफी भाग्यशाली हैं क्योंकि उन्हें स्थायी नौकरी मिल गई है। उन्होंने कहा, "आईपीएल के दौरान वांडर्स स्टेडियम प्रबंधन समिति को कुछ रखवालों की जरूरत थी। मैं भाग्यशाली हूं कि मुझे स्थायी नौकरी मिल गई है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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