पीसीबी अपने इस फैसले के कारण विवादों में घिर सकता है क्योंकि यूसुफ ने अभी तक आधिकारिक तौर पर बागी इंडियन क्रिकेट लीग (आईसीएल) से नाता नहीं तोड़ा है। यूसुफ हालांकि कह चुके हैं कि वह आईसीएल से नाता तोड़ चुके हैं लेकिन इस संबंध में उन्होंने अब तक अनापत्ति प्रमाणपत्र पेश नहीं किया है, जिसकी मांग पीसीबी अपने खिलाड़ियों से लगातार करता रहा है।
यूसुफ को टीम में शामिल करना पीसीबी की मजबूरी भी हो सकती है लेकिन इसे बागी खिलाड़ियों को टीम में वापस लाने के बहाने के तौर पर भी देखा जा सकता है। दोनों सूरतों में पीसीबी का फैसला विवादित होगा क्योंकि वह उन शर्तो के खिलाफ जाएगा, जिसके तहत बागी खिलाड़ियों को राष्ट्रीय टीमों में जगह नहीं देने की बात कही गई है।
पीसीबी ने इससे पहले भी क्रांतिकारी फैसले लेते हुए अपने तीन बागी खिलाड़ियों को ट्वेंटी-20 विश्व कप की संभावितों की सूची में जगह दी थी लेकिन अंतर्राष्ट्रीय दबाव के आगे उसने उन खिलाड़ियों के नाम वापस ले लिए थे।
अब एक बार फिर पीसीबी उसी रास्ते पर चलने की कोशिश कर रहा है लेकिन वह यह बात शायद भूल गया है कि उसने यूसुफ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात कही थी क्योंकि उन्हें पाकिस्तानी टीम में रहते हुए आईसीएल के साथ करार किया था।
पीसीब की दलील है कि वह श्रीलंका के दो विश्व स्तरीय स्पिनरों-मुथैया मुरलीधरन और असंथा मेंडिस से घबराया हुआ है और यही कारण है कि यूसुफ को टीम में शामिल करने की बात चल रही है।
गौर करने वाली बात यह है कि बांग्लादेश जैसी टीम अपने कई प्रमुख खिलाड़ियों के बगैर खेलते हुए कई मैच हार चुकी है फिर भी बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट बिरादरी के खिलाफ जाकर बागियों को टीम में जगह देने की बात नहीं कही।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।