इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की आधिकारिक वेबसाइट 'आईपीएल क्रिकेट डॉट कॉम' से बातचीत के दौरान शिफर्ड ने कहा कि सिर्फ चार विदेशी खिलाड़ियों को मैदान में उतारने के कारण कई बार टीम की रणनीति बुरी तरह प्रभावित होती है, लिहाजा विदेशी खिलाड़ियों की संख्या में वृद्धि होनी चाहिए।
मौजूदा नियम के मुताबिक किसी एक टीम में सिर्फ चार विदेशी खिलाड़ी मैदान में उतर सकते हैं जबकि एक टीम अधिक से अधिक 10 विदेशी खिलाड़ियों को अपने साथ रख सकती है।
शिफर्ड ने कहा, "वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर ज्यादातर मैचों में अच्छी बल्लेबाजी नहीं कर सके। ऐसे में हमें अब्राहम डिविलियर्स और तिलकरत्ने दिलशान जैसे विदेशी बल्लेबाजों और डेनियल विटोरी और डिर्क नैन्स जैसे गेंदबाजों पर आश्रित रहना पड़ा। इस कारण हम ग्लेन मैक्ग्राथ जैसे गेंदबाज को एक मैच में भी नहीं मैदान में उतार सके। कई बार विदेशी खिलाड़ियों को यह समझाना मुश्किल हो जाता है कि उन्हें टीम में क्यों नहीं शामिल किया जा रहा है।"
दिल्ली की टीम अपने तीन प्रमुख विदेशी खिलाड़ियों के एक मैच के लिए भी नहीं आजमा सकी। मैक्ग्राथ टूर्नामेंट की शुरुआत से टीम के साथ हैं जबकि पॉल कोलिंगवुड और ओवेश शाह अपनी बारी का इंतजार करने के बाद स्वदेश लौट चुके हैं।
सिर्फ चार विदेशी खिलाड़ियों को टीम में शामिल करने की बाध्यता के कारण दिल्ली की टीम आईपीएल के पहले संस्करण में अच्छा प्रदर्शन करने वाले श्रीलंकाई गेंदबाज फरवेज महरूफ को कुछ एक मैचों के लिए ही मैदान में उतार सकी।
शिफर्ड ने आईपीएल आयोजन समिति को सलाह दी है कि वह कुछ मैचों में कम से कम छह विदेशी खिलाड़ियों को खेलने का मौका दे। बकौल शिफर्ड, "मैं यह नहीं कहता कि एक टीम में सभी खिलाड़ी विदेशी ही हों लेकिन कुछ महत्वपूर्ण मुकाबलों में विदेशी खिलाड़ियों की संख्या छह तक बढ़ाई जा सकती है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।