सेमीफाइनल तक का रास्ता तय करने के लिए अनिल कुंबले और महेंद्र सिंह धौनी की टीमों ने बिल्कुल अलग तरह का रास्ता तय किया है। चेन्नई की टीम ने शुरुआती मैचों में अच्छा प्रदर्शन करते हुए अपने लिए अंतिम-चार की सीट सुरक्षित की जबकि बैंगलोर की टीम ने आधे चरण के बाद अपने प्रदर्शन में महत्वपूर्ण सुधार लाते हुए यहां तक का रास्ता तय किया।
बैंगलोर की टीम टूर्नामेंट के पहले संस्करण में बुरी तरह फ्लॉप रही थी लेकिन इस सत्र में उसके प्रदर्शन में जबरदस्त बदलाव आया है। केविन पीटरसन की कप्तानी में शुरुआती छह मैचो में खराब खेलने के बाद इस टीम ने अनिल कुंबले की कप्तानी में बाद के आठ मैचों में बढ़िया खेलकर खुद को साबित किया है।
बैंगलोर की टीम अगर चेन्नई को हराकर फाइनल और फिर खिताब तक का सफर तय कर ले तो हैरानी नहीं होनी चाहिए। अब तक के प्रदर्शन से तो इस बात के आसार दिख रहे हैं लेकिन फाइनल में स्थान बनाने के लिए बैंगलोर के बल्लेबाजों को चेन्नई की धुरंधर बल्लेबाजी तिकड़ी-मैथ्यू हेडन, सुरेश रैना और धौनी को सस्ते में पेवेलियन लौटाना होगा।
हेडन और रैना का फार्म देखते हुए बैंगलोर के लिए यह काम कतई आसान नहीं लेकिन जैसा कि क्रिकेट में एक कहावत मशहूर है-मैच के दिन जो टीम अच्छा खेलती है, वही जीतती है-के आधार पर देखा जाए तो यह काम नामुमकिन भी नहीं।
दो टीमों की वर्चस्व की लड़ाई में जाहिर तौर पर दर्शकों को भरपूर लुत्फ उठाने का मौका मिलेगा क्योंकि पिछले बार खिताब जीतने से महरूम रही चेन्नई की टीम इस बार अपने हाथ से कोई मौका फिसलने नहीं देना चाहेगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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