इस ऐतिहासिक मैदान की स्थापना 1841 में हुई थी। इसका नामकरण नाटिंघम शहर से होकर बहने वाली ट्रेंट नदी के नाम पर किया गया है। लगभग 17,000 की क्षमता वाले इस स्टेडियम में पहला टेस्ट मैच 1899 में आस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच खेला गया था।
वर्ष 1910 तक मैदान यह नॉटिंघमशायर काउंटी क्रिकेट क्लब और नॉट्स काउंटी फुटबाल क्लब का घरेलू मैदान था। इसके बाद इसे पूर्ण रूप से क्रिकेट के लिहाज से विकसित किया गया। फुटबाल मैदान को लगभग 100 गज दूर स्थित मिडो लेन में स्थानांतरित कर दिया गया।
वर्ष 2008 में इस मैदान को फ्लड-लाइट से सुसज्जित किया गया। विश्व कप के कई मुकाबले कृत्रिम रोशनी में खेले जाने हैं, लिहाजा इस मैदान को विश्व कप मैचों का एक बड़ा हिस्सा मिला है।
विश्व कप के तहत इस मैदान पर भारत का पहला मैच छह जून को बांग्लादेश के साथ खेला जाना है। भारत को बांग्लादेश और आयरलैंड के साथ एक ग्रुप में रखा गया है। आयरलैंड के साथ भारत की भिड़ंत 10 जून को इसी मैदान पर होनी है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।