अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने घोषणा की थी कि इस मैच से होने वाली आय को लाहौर में तीन मार्च को श्रीलंकाई खिलाड़ियों पर हुए आतंकी हमले में मारे गए लोगों के बच्चों की पढ़ाई में खर्च किया जाएगा लेकिन इस संबंध में भारत सरकार को कोई जानकारी नहीं दी गई।
आईसीसी ने इस मैच को लोकप्रिय बनाने और अधिक से अधिक दर्शकों को आकर्षित करने के लिए इसे सहायतार्थ मैच घोषित तो कर दिया लेकिन इस मैच से होने वाली आय को किस प्रकार और किसके माध्यम से प्रभावितों के परिजनों में वितरित किया जाएगा, इस संबंध में कोई सोच-विचार नहीं किया।
आईसीसी ने स्वीकार किया है कि इस संबंध में विचार-विमर्श जारी है और किसी जिम्मेदार संस्था के माध्यम से प्रभावितों को मदद पहुंचाई जाएगी।
आईसीसी के प्रवक्ता ब्रयान मुर्गाट्रोड ने कहा, "हमने इस संबंध में अभी तक कोई फैसला नहीं किया है लेकिन मुझे उम्मीद है कि जल्द ही किसी जिम्मेदार संस्था की खोज कर ली जाएगी।"
मुर्गाट्रोड ने कहा कि इस मैच को सहायतार्थ रूप देने के प्रयास में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष शशांक मनोहर की भी सहमति शामिल थी। भारत सरकार ने हालांकि इस मुहिम से पल्ला झाड़ लिया है।
सरकार का पक्ष रखते हुए विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि यह मुद्दा बीसीसीआई और आईसीसी से जुड़ा है। इसमें सरकार दखल नहीं दे सकती क्योंकि बीसीसीआई एक स्वतंत्र संस्था है।
अधिकारी ने कहा, "बीसीसीआई हमारी राय लेने के लिए बाध्य नहीं है। हमें इस बात से कोई मतलब नहीं कि मैच से होने वाली आय सहायतार्थ खर्च की जा रही है या फिर किसी और काम में। बीसीसीआई सरकारी संस्था नहीं, लिहाजा हमारा उस पर किसी प्रकार का नियंत्रण नहीं है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।