वर्ष 2007 में खेले गए टूर्नामेंट के पहले संस्करण की उपविजेता रही पाकिस्तानी टीम दक्षिण अफ्रीका और भारत के साथ हुए अपने दोनों अभ्यास मैच हार चुकी है। इस लिहाज से उसका मनोबल गिरा हुआ है। ट्वेंटी-20 में उसका रिकार्ड और टीमों से बेहतर है लेकिन जीत दमदार रिकार्ड की बदौलत नहीं बल्कि खेल के दम पर मिलती है।
पाकिस्तानी टीम के लिए सबसे अधिक चिंता का विषय यह है कि उसने 2008 में सबसे कम क्रिकेट खेला है। पाकिस्तान में जारी अशांति इसका सबसे बड़ा कारण है। ऐसा भी कहा जा रहा है कि पाकिस्तानी टीम में एकता का अभाव है और खिलाड़ी दो गुटों में विभाजित हैं।
इस कारण भी टीम का प्रदर्शन प्रभावित हो रहा है। अपने अंतिम अंतर्राष्ट्रीय ट्वेंटी-20 मुकाबले में आस्ट्रेलिया को हराने के बाद दो अभ्यास मैचों में उसकी हार इस ओर इशारा करती है कि यूनुस खान की कप्तानी में इस टीम के साथ सबकुछ अच्छा नहीं चल रहा है।
तमाम दुश्वारियों के बावजूद इस टीम को खिताब के प्रबल दावेदार के तौर पर देखा जा रहा है। सोहेल तनवीर, उमर गुल, शाहिद आफरीदी और सईद अजमल के रहते पाकिस्तानी आक्रमण पंक्ति में विविधता दिखाई देती है। बल्लेबाजों की बात करें तो सलमान बट्ट, यूनुस खान, कामरान अकमल, मिस्बाह-उल-हक, अफरीदी और अहमद शहजाद के तौर पर उसके पास कुछ ऐसे खिलाड़ी हैं जो किसी भी आक्रमण पंक्ति की धज्जियां उड़ा सकते हैं।
भारत के खिलाफ हुए अभ्यास मैच में पाकिस्तानी बल्लेबाजों ने विपरीत परिस्थितियों में 150 रनों से अधिक का लक्ष्य खड़ा किया था। इसे टीम की मजबूती के तौर पर देखा जा सकता है लेकिन क्रिकेट से सबसे नए प्रारूप के लिहाज से बट्ट और यूनुस जैसे वरिष्ठ खिलाड़ियों की कमजोरी टीम को भारी पड़ सकती है। इसके अलावा अफरीदी के खेल की अनिश्चितता पाकिस्तानी खेमे को हमेशा परेशान किए रहती है।
इन सबके बावजूद अफरीदी पाकिस्तान के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। इसके अलावा गुल और अकमल भी अपनी टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा सकते हैं। नए गेंदबाज मोहम्मद आमिर और सलामी बल्लेबाज शहजाद हसन को मौका मिला तो दोनों इंग्लैंड में अपनी गेंदों का जादू भी दिखा सकते हैं लेकिन इन सबके लिए पाकिस्तानी टीम को 'एक' होकर खेलना होगा।
दूसरी ओर, पॉल कोलिंगवुड की कप्तानी में पहली बार किसी विश्व कप में खेल रही इंग्लैंड टीम को अपने घर में चहेते दर्शकों के बीच खेलने का फायदा मिलेगा। इंग्लैंड की टीम ट्वेंटी-20 विश्व कप में अपना सातवां मैच खेलेगी। दक्षिण अफ्रीका में खेले गए पहले संस्करण के दौरान इंग्लैंड ने पांच मैच खेले थे। एक में उसकी जीत हुई थी जबकि चार में उसे हार का सामना करना पड़ा था।
वर्ष 2007 में तो इंग्लैंड की टीम सेमीफाइनल में नहीं पहुंच सकी थी। इस बार उसने अपने कप्तान, केविन पीटरसन, रवि बोपारा, ओवेस शाह, दमित्रि मास्कारेनहास जैसे धुरंधर बल्लेबाजों तथा स्टुअर्ट ब्रॉड, जेम्स एंडरसन, ग्रीम स्वान, रेयान साइडबॉटम और आदिल राशिद जैसे गेंदबाजों के उम्दा प्रदर्शन के बूते अंतिम चार में पहुंचने का लक्ष्य रखा है।
पीटरसन बिल्कुल साफ शब्दों में कह चुके हैं कि वह ट्वेंटी-20 क्रिकेट के अच्छे खिलाड़ी नहीं हैं लेकिन इसके बावजूद वह इंग्लैंड के लिए उम्मीद की सबसे बड़ी किरण होंगे। इसके अलावा बोपारा, ब्रॉड, शाह, मास्कारेनहास और कोलिंगवुड भी अपनी टीम के लिए असीम योगदान देने के साथ-साथ पाकिस्तानी टीम के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।