इस टीम ने उद्घाटन मैच में भी साबित कर दिया था कि ट्वेंटी-20 में किसी को कमतर आंकने का क्या अंजाम हो सकता है। ऐसे में पाकिस्तान को बेहद सावधान रहकर तयशुदा रणनीति के साथ मैदान में उतरना होगा।
इंग्लैंड की टीम ने हालांकि अपने दूसरे मुकाबले में पाकिस्तान को हराकर सुपर-8 दौर में जगह पक्की कर ली है लेकिन नीदरलैंड्स के खिलाफ अगर पाकिस्तान नतीजा अपने पक्ष में नहीं कर पाता है तो उसका पत्ता कट जाएगा।
पाकिस्तानी खेमे से अच्छी खबरें नहीं आ रही हैं। इंग्लैंड के खिलाफ मिली हार के बाद कोच इंतिखाब आलम और कप्तान यूनुस खान के बीच एक खाई बनती दिख रही है। रणनीति को लेकर कप्तान और कोच की राय अलग-अलग है और यही कारण है कि इंग्लैंड के खिलाफ पाकिस्तानी टीम की रणनीति सही शक्ल नहीं ले पाई।
टूर्नामेंट में बने रहने के लिए पाकिस्तान को नीदरलैंड्स के खिलाफ हर हाल में जीत हासिल करनी होगी लेकिन नीदरलैंड्स टीम के खिलाड़ियों के बुलंद हौसले के आगे पाकिस्तान पस्त भी हो सकता है।
नीदरलैंड्स को एक बार फिर बल्लेबाजी में टॉम डी ग्रूथ, पीटर बोरेन और रेयान टेन डोशाते से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद होगी जबकि गेंदबाजी में एडगर शिफरली और डोशाते के अलावा उसे डिर्क नैन्स पर भरोसा होगा।
पाकिस्तानी गेंदबाजों को नीदरलैंड्स को स्कोर पर आउट करने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ सकती है क्योंकि इंग्लैंड के खिलाफ उनका प्रदर्शन बेहद औसत रहा था। सोहेल तनवीर की गैरमौजूदगी में सईद अजमल को छोड़कर पाकिस्तान के सभी गेंदबाजों की जबरदस्त धुनाई हुई थी।
बल्लेबाजी में कप्तान यूनुस खान को छोड़कर कोई अन्य खिलाड़ी अपना प्रभाव नहीं छोड़ सका था। स्टुअर्ट ब्रॉड की घूमती गेंदों के आगे पाकिस्तानी बल्लेबाज बेबस नजर आए थे। ऐसे में नैन्स के सामने भी उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि इंडियन प्रीमियर लीग में धूम मचाने वाले इस गेंदबाज को पाकिस्तानी बल्लेबाज पहली बार खेलेंगे।
कुल मिलाकर पाकिस्तान के लिए यह मैच प्रतिष्ठा की लड़ाई है। जीत की सूरत में उसे सुपर-8 की सीट मिलेगी लेकिन हार की सूरत में उसे जलालत झेलनी पड़ेगी क्योंकि पिछले संस्करण का फाइनल खेलने वाली एक टीम का इस बार सुपर-8 में भी नहीं पहुंच पाना वाकई बेहद शर्मनाक होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।