बंगाल की टीम ने 29 बार इस खिताब पर कब्जा किया है जबकि सेना को अभी खिताबी जीत का इंतजार है। दूसरे सेमीफाइनल में गुरुवार को तमिलनाडु और गोवा के बीच मुकाबला होना है।
सेना के लिए यह मुकाबला काफी खास रहेगा क्योंकि वह बाहर जाते-जाते सेमीफाइनल तक का सफर तय करने में सफल रही है। गोवा के खिलाफ 0-1 से हारने के बाद कर्नाटक के खिलाफ 1-0 से मिली जीत ने उसे नया जीवनदान दिया था।
बंगाल को हराने के लिए सेना को काफी मेहनत करनी होगी क्योंकि इस बार उसके प्रदर्शन में वह तेजी नहीं दिख रही है, जो पिछले साल दिखी थी। यही कारण है कि इस साल सेना के नाम सबसे कम गोल दर्ज हैं।
पिछली बार सेना की टीम बंगाल को 4-1 से पराजित कर फाइनल में पहुंची थी लेकिन उसे पंजाब के हाथों हार का मुंह देखना पड़ा था।
दूसरी ओर, एक साल पहले सेमीफाइनल में शिकस्त खाने वाली बंगाल की टीम ने ने अपने खेल में काफी सुधार किया है और उसका एकमात्र लक्ष्य सेना से पिछले साल मिली हार का हिसाब चुकाना होगा। बंगाल की टीम में ऐसा करने की क्षमता है और अगर वह सेना को पटखनी देने में सफल रही तो वह अपना 30वां खिताब भी जीत सकती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।