आईसीसी के नियमों के मुताबिक किसी टूर्नामेंट के दौरान एक टीम स्थानापन्न की मांग तभी कर सकती है, जब चोट के कारण बाहर किए जा रहे खिलाड़ी को टूर्नामेंट के दौरान ही चोट लगी हो। पाकिस्तानी टीम यासिर अराफात की जगह अब्दुर रज्जाक को इंग्लैंड भेजने की इजाजत प्राप्त कर चुकी है लेकिन सहवाग के स्थानापन्न को लेकर मामला उलझता दिख रहा है।
बीसीसीआई ने विकेटकीपर बल्लेबाज दिनेश कार्तिक को सहवाग के स्थानापन्न के तौर पर इंग्लैंड भेजने का फैसला किया था लेकिन आईसीसी ने यह कहते हुए फिलहाल इस पर रोक लगा दी है कि उसे सहवाग की चोट से संबंधित डॉक्टरी रिपोर्ट अब तक प्राप्त नहीं हुई है।
कार्तिक को इंग्लैंड भेजने के लिए बीसीसीआई ने आईसीसी के सामने सहवाग की जो फिटनेस रिपोर्ट पेश की थी, वह फिजियो नितिन पटेल द्वारा तैयार की गई थी जबकि उसे तैयार करने का हक सिर्फ टीम के डॉक्टर को है। बीसीसीआई की इस गलती का यह नजीता हुआ कि आईसीसी ने तत्काल प्रभाव से फिजियो की रिपोर्ट को नकार दिया और बीसीसीआई से डॉक्टर की रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा।
आईसीसी ने साफ कर दिया है कि वह कार्तिक को इंग्लैंड भेजने की इजाजत तभी देगा, जब बीसीसीआई सहवाग की चोट संबंधी डॉक्टरी रिपोर्ट उसके सामने पेश करेगा।
सहवाग ने एक दिन पहले स्वीकार किया था कि उन्हें इंडियन प्रीमियर लीग के सेमीफाइनल मुकाबले के दौरान चोट लगी थी। इस लिहाज से बीसीसीआई को सहवाग का स्थानापन्न पाने का कोई अधिकार नहीं लेकिन बीसीसीआई ने सहवाग को चोट कहां लगी, इस मुद्दे पर आईसीसी को अंधेरे में रखते हुए स्थानापन्न की मांग की।
इस पूरी घटना का सबसे दुखदाई पक्ष यह है कि बीसीसीआई ने सहवाग की चोट की जगह और उसकी गंभीरता को आईसीसी से छुपाया। आईसीसी नियमों के मुताबिक अगर किसी खिलाड़ी को ग्रेड-बी या ग्रेड-सी स्तर की चोट लगी है तो उसे टीम के साथ विदेशी दौरे पर नहीं भेजा सकता।
बीसीसीआई ने कहा कि सहवाग को ग्रेड-ए स्तर की चोट है लेकिन उसकी यह दलील उस समय झूठी साबित हुई जब सहवाग के बिना खेले स्वदेश लौटने की नौबत आ गई। ग्रेड-ए स्तर की चोट से एक खिलाड़ी तीन-चार दिनों में उबर जाता है लेकिन सहवाग की चोट इतनी गंभीर दिखाई दे रही है कि इससे उबरने के लिए उन्हें ऑपरेशन कराने की नौबत आ सकती है। यह बात बीसीसीआई अपने बयान में कह चुका है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।