दक्षिण अफ्रीकी टीम इस विश्व कप में अब तक अजेय रही है। उसने ग्रुप स्तर के अपने दोनों मैचों को जीतने के साथ-साथ सुपर-8 दौर के तीनों मैच भी जीते हैं। इस मामले में पाकिस्तान का रिकार्ड उतना प्रभावी नहीं रहा है। पाकिस्तान ने ग्रुप स्तर में एक जीत हासिल की थी जबकि सुपर-आठ दौर में उसे दो जीत हासिल हुई है।
ग्रुप स्तर में दक्षिण अफ्रीका ने जहां न्यूजीलैंड और स्कॉटलैंड को हराया था वहीं सुपर-आठ में उसने वेस्टइंडीज, इंग्लैंड और भारत को पराजित किया। पाकिस्तान ने ग्रुप स्तर में नीदरलैंड्स को हराया था जबकि इंग्लैंड के खिलाफ उसे हार मिली थी। सुपर आठ में पाकिस्तान ने आयरलैंड और न्यूजीलैंड को हराया है जबकि श्रीलंका के खिलाफ उसे हार मिली है।
दक्षिण अफ्रीकी टीम मुख्य रूप से बल्लेबाजी में जहां कप्तान ग्रीम स्मिथ, हर्शल गिब्स, अब्राहम डिविलियर्स और जैक्स कालिस पर निर्भर करेगी वहीं गेंदबाजी में उसे कालिस के अलावा डेल स्टेन, मोर्न मोर्कल, जेहान बोथा और वायने पार्नेल से उम्मीदें होंगी।
दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाजों को पाकिस्तान के तेज गेंदबाज उमर गुल और स्पिनर शाहिद अफरीदी से सबसे अधिक सावधान रहने की जरूरत है। इसके अलावा स्पिनर सईद अजमल भी स्मिथ की टीम के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।
गुल ने न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन ओवर के स्पेल में छह रन देकर पांच विकेट झटके थे। वह ट्वेंटी-20 विश्व कप इतिहास के सबसे सफल गेंदबाज हैं। गुल के नाम सर्वाधिक 25 विकेट दर्ज हैं जबकि अफरीदी ने दोनों संस्करणों में अब तक 20 विकेट लिए हैं।
दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों को जितनी जल्दी हो सके, पाकिस्तानी कप्तान यूनुस खान, कामरान अकमल, शाहिद अफरीदी और मिस्बाह उल हक से छुटकारा पाना होगा। पाकिस्तान के बल्लेबाज हालांकि इस श्रृंखला में बहुत प्रभावी स्कोर नहीं खड़े सके हैं और यही कारण है कि उन्हें हर बार जीत के लिए गेंदबाजों का मुंह ताकना पड़ा है।
लगभग 17 साल पहले अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी करने वाली दक्षिण अफ्रीकी टीम एक बार भी विश्व खिताब पर कब्जा नहीं कर सकी है। कई मौकों पर जीत उसके हाथ से निकल गई है। ट्वेंटी-20 विश्व कप के पहले संस्करण के दौरान भी उसे सेमीफाइनल में हार मिली थी लेकिन इस बार स्मिथ की टीम अपने सिर खिताब का सेहरा बांधने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहेगी।
दूसरी ओर, पाकिस्तान के लिए यह जीत काफी अहम होगी क्योंकि इससे परोक्ष रूप से युद्ध प्रभावित इस देश में क्रिकेट को फिर से पैर जमाने का मौका मिलेगा। तीन मार्च को लाहौर में श्रीलंकाई खिलाड़ियों के काफिले पर हुए आतंकी हमले के बाद से पाकिस्तान में अब तक कोई अंतर्राष्ट्रीय मैच नहीं खेला गया है और आने वाले दिनों में वहां मैच खेले जाने की संभावना भी नहीं दिखाई देती।
पाकिस्तान पिछले संस्करण के फाइनल में भारत से हार गया था। पिछली बार भी पाकिस्तानी टीम काफी उतार चढ़ाव के बाद फाइलन में पहुंची थी लेकिन ऐन मौके पर उसकी मुहिम ने दम तोड़ दिया था। इस बार यूनुस खान कोई मौका नहीं चूकना चाहेंगे क्योंकि यह खिताब जीतने के बाद उनकी कप्तानी पक्की हो जाएगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।