टॉस जीतने के बाद पहले बल्लेबाजी करने उतरी श्रीलंकाई टीम ने 13वें ओवर में मात्र 70 रन के कुल योग पर ही अपने छह विकेट गंवा दिए थे लेकिन कप्तान कुमार संगकारा (नाबाद 64) और एंजेलो मैथ्यूज (नाबाद 35) ने संकटमोचक की भूमिका निभाते हुए सातवें विकेट के लिए नाबाद 68 रन जोड़कर निर्धारित 20 ओवरों में अपनी टीम का योग छह विकेट खोकर 138 रन तक पहुंचा दिया।
जवाब में खेलने उतरी पाकिस्तानी टीम ने कामरान अकमल (37), शाहिद अफरीदी (नाबाद 54) और शोएब मलिक (नाबाद 24) की आतिशी बल्लेबाजी की बदौलत 18.4 ओवरों में दो विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। अकमल ने अपनी 28 गेंदों की पारी के दौरान दो चौके और दो छक्के लगाए। अकमल ने शाहजैब हुसैन (19) के साथ पहले विकेट के लिए 48 रन जोड़े। अकमल का विकेट गिरने के बाद हुसैन भी ज्यादा देर नहीं टिक सके और 63 रन के कुल योग पर पेवेलियन लौट गए।
इसके बाद अफरीदी और मलिक ने तीसरे विकेट के लिए नाबाद 76 रन जोड़कर अपनी टीम को आठ गेंदें शेष रहते विश्व विजेता का ताज पहना दिया। अफरीदी ने अपनी 40 गेंदों की नाबाद पारी के दौरान दो चौके और दो छक्के लगाए जबकि मलिक ने 22 गेंदों का सामना करते हुए सिर्फ एक बार गेंद को सीमा रेखा के बाहर भेजा।
इससे साफ है कि मलिक अपनी टीम को विश्व विजेता का ताज पहनते देखने के लिए कितने प्रतिबद्ध थे। इसका कारण यह भी हो सकता है कि पिछले साल दक्षिण अफ्रीका में उनकी कप्तानी में खेलते हुए ही पाकिस्तानी टीम फाइनल में भारत के हाथों हार गई थी।
अफरीदी ने टीम के सबसे अनुभवी खिलाड़ी की भूमिका के साथ न्याय करते हुए अपनी विजयी रन बनाए। इस प्रयास के लिए अफरीदी को 'मैन ऑफ द मैच' चुना गया जबकि श्रीलंका के तिलकरत्ने दिलशान को 'मैन ऑफ द सीरीज' खिताब के नवाजा गया। बेहतरीन फार्म में चल रहे दिलशान हालांकि खिताबी मुकाबले में ही बुरी तरह फ्लाप रहे। पारी की पांचवीं गेंद पर ही वह गेंद को फाइनल लेग के ऊपर से सीमा रेखा के बाहर पहुंचने के प्रयास में लपके गए। उस समय वह खाता भी नहीं खोल सके थे।
खाता तो श्रीलंकाई टीम का भी नहीं खुला था। युवा तेज गेंदबाज मोहम्मद आमिर के इस ओवर में मिली सफलता से प्रेरित होकर यूनुस ने पैंतरा बदला और आक्रमण पर अब्दुर रज्जाक को लेकर आए। रज्जाक ने अपने कप्तान के फैसले का सम्मान करते हुए आते ही जेहान मुबारक (0) को चलता कर दिया। उस समय टीम का कुल योग दो रन था।
इसके बाद सनत जयसूर्या (17) और कप्तान ने मिलकर स्कोर को 26 तक पहुंचाया था कि रज्जाक ने जयसूर्या को बोल्ड कर श्रीलंका की कमर तोड़ दी। इस झटके से घबराई श्रीलंकाई टीम ने 32 रन के कुल योग पर माहेला जयवर्धने (1) का विकेट भी गंवा दिया। अब पारी को संवारने की जिम्मेदारी चमारा सिल्वा (14) और कप्तान पर आ गई। दोनों ने स्कोर को 67 तक पहुंचाया लेकिन इसकी योग पर उमर गुल ने अपनी रिवर्स स्विंग के दम पर सिल्वा को चलता कर दिया।
सिल्वा और कप्तान ने पांचवें विकेट के लिए 35 रन जोड़े। कुल योग में अभी तीन रन भी नहीं जोड़े थे कि अफरीदी ने इसुरू उदाना (1) को भी अपने साथियों के पास भेज दिया। भारी दबाव में दिख रही श्रीलंकाई टीम अब पूरी तरह संगकारा और मैथ्यूज पर आश्रित थी। दोनों ने अपनी भूमिका के साथ भरपूर न्याय करते हुए 13वें ओवर के बाद एक भी विकेट नहीं गिरने दिया और स्कोर को 138 रनों तक पहुंचा दिया।
संगकारा ने अपनी 52 गेंदों की पारी के दौरान सात चौके लगाए जबकि मैथ्यूज ने ताबड़तोड़ अंदाज में खेलते हुए 24 गेंदों पर तीन चौकों और एक छक्के की मदद से 35 रन बनाए। पाकिस्तान की ओर से रज्जाक ने तीन विकेट लिए जबकि गुल, अफरीदी और आमिर को एक-एक सफलता मिली।
जीत के बाद यूनुस खान ने कहा कि वह अपनी टीम के प्रदर्शन से अभिभूत हैं। बकौल खान, "मैं इस खुशी को बयां नहीं कर सकता। हमारे लिए यह सबसे अच्छी बात थी कि हमें कोई खिताब का दावेदार नहीं मान रहा था। यह एक इकाई के तौर पर खेलने वाली टीम और एक सबल राष्ट्र की जीत है। मैं अपने साथियों के जज्बे के सलाम करता हूं। मुझे खुशी है कि हमने साबित कर दिया कि हम मुख्य धारा में बने हुए हैं और इंशाल्लाह बने रहेंगे।"
हारी हुई टीम के कप्तान संगकारा ने कहा कि हार के बावजूद उन्हें अपनी टीम पर गर्व है। संगकारा ने कहा, "हार और जीत खेल का अंग हैं। मैं हार से निराश जरूर हूं लेकिन एक बेहद प्रतिभाशाली टीम का कप्तान होना मेरे लिए गर्व की बात है। मुझे खुशी है कि हम पाकिस्तान के सामने चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रख सके। हम आसानी से नहीं हारे। यही जज्बा मुझे पसंद है क्यों आने वाले दिनों में हमें काफी क्रिकेट खेलना है और उस दौैरान यही जज्बा काम आएगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।