नई दिल्ली, 25 जून (आईएएनएस)। आर्थिक संसाधनों की कमी से जूझ रहे भारतीय फुटबाल क्लब नए सत्र में बने रहने के लिए खिलाड़ियों की संख्या में कमी, वेतन में कटौती और प्रदर्शन के आधार पर भुगतान जैसे कदम उठा रहे हैं।
आर्थिक मंदी ने भारतीय फुटबाल क्लबों को चोट पहुंचाई है और कंजूस बन गए प्रायोजकों ने उनसे फालतू खर्चो में कटौती के रास्ते तलाशने को कहा है।
परंतु खिलाड़ी इन सबसे अप्रभावित हैं और सोचते हैं कि उन पर इसका प्रभाव सबसे अंत में होगा।
कोलकाता के उद्योग जगत से सबसे अधिक लाभ हासिल करने क्लबों मोहन बागान और ईस्ट बंगाल को उनके प्रायोजक यूनाइटेड ब्रेवरीज समूह ने बता दिया है कि दोनों क्लबों को 6.5 करोड़ रुपये के बजाए पांच करोड़ रुपये ही मिलेंगे। वहीं मुंबई के एफसी क्लब के स्वामी एस्सेल समूह ने खिलाड़ियों की संख्या में कमी करने के साथ ही प्रदर्शन आधारित भुगतान का तरीका लागू किया है।
नए क्लब पुणे एफसी के संचालनकर्ता अशोक पीरामल समूह ने स्थानीय प्रतिभाओं को मौका देने और पूर्व राष्ट्रीय लीग चैम्पियन जेसीटी फगवाड़ा ने बड़े नामों से परहेज करने का निर्णय लिया है।
मोहन बागान ने 2008-09 में अपने बेहतर प्रदर्शन के आधार पर यूबी समूह से प्रायोजन राशि बढ़ाने की अपील की है। पिछले सत्र में कोई खिताब जीतने में विफल ईस्ट बंगाल अपने समर्थकों से दान चाह रहा है।
मोहन बागान के सचिव अंजन मित्रा ने आईएएनएस से कहा कि एक बड़ी लीग में खेलने के लिए अधिक यात्रा करने की आवश्यकता होती है और यूबी समूह से सात करोड़ रुपये देने का आग्रह किया गया है, यदि यह पैसा नहीं मिला तो क्लब को चलाना कठिन होगा।
ईस्ट बंगाल के निदेशक अमित सेन ने स्वीकार किया कि एक ऑनलाइन लाटरी कंपनी प्लेविन के हटने से क्लब को धक्का लगा है। यद्यपि रीबॉक के साथ उनका करार कायम है।
मुंबई एफसी की संचालक एस्सेल समूह ने कहा कि अन्य वैश्विक क्लबों के समान खर्चो में सावधानी बरती जा रही है। खिलाड़ियों की संख्या भी 34 से घटाकर 25 कर दी गई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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