घरेलू क्रिकेट को पुनर्जीवित करने के लिए बीसीसीआई ने पिछले वर्ष विदेशी खिलाड़ियों को खेलने के अनुमति दी थी लेकिन अब वह यह मान रही है कि घरेलू क्रिकेट को पुनर्जीवित करने के लिए विदेशी खिलाड़ियों का शामिल होना जरूरी नहीं है।
क्रिकेट सेंटर में बीसीसीआई की तकनीकी समिति ने बुधवार को इस फैसले पर मुहर लगाई। इस समिति के प्रमुख पूर्व क्रिकेटर सुनील गावस्कर हैं। समिति के सदस्यों में चेतन चौहान, एम.वी. श्रीधर. बिमान भट्टाचार्य, मिलिद रेगे, ज्ञानेंद्र पांडे, के. श्रीकांत, सौरव गांगुली, वी.के. रामास्वामी और बोर्ड सचिव एन. श्रीनिवासन शामिल हैं।
बैठक के बाद श्रीनिवासन कहा, "वर्ष 2009-10 सत्र से घरेलू टूर्नामेंट में विदेशी खिलाड़ियों को खेलने की अनुमति नहीं होगी।"
बीसीसीआई के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी रत्नाकर शेट्टी ने आईएएनएस से कहा कि समिति ने महसूस किया कि घरेलू टूर्नामेंट को मजबूती प्रदान करने के लिए विदेशी खिलाड़ियों की कोई जरूरत नहीं है।
शेट्टी ने कहा कि पिछले साल विदेशी खिलाड़ियों को खेलने की अनुमति दी गई थी लेकिन समिति ने महसूस किया घरेलू क्रिकेट को मजबूती देने के लिए अब इसकी कोई जरूरत नहीं है। हमारे टूर्नामेंट अव्वल दर्जे के हैं और इसके जरिये कई प्रतिभावान खिलाड़ी उभरकर सामने आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस साल राज्य क्रिकेट एसोसिएशन ने भी विदेशी खिलाड़ियों में कोई खास रुचि नहीं दिखाई है। केवल बड़ौदा ने तिलकरत्ने दिलशान और बंगाल ने मुथैया मुरलीधरन में रुचि दिखाई। इसलिए हमने अंतत: फैसला किया कि विदेशी खिलाड़ियों को अनुमति नहीं दी जाए।
समिति ने इसके साथ ही मेहमान खिलाड़ियो की संख्या भी घटाकर तीन कर दी है। पहले किसी भी टीम में चार मेहमान खिलाड़ियों को शामिल किए जाने का प्रावधान था। समिति ने रणजी ट्राफी के नॉकआउट मैचों के लिए तटस्थ स्थल प्रणाली को भी खत्म कर दिया है।
समिति ने यह भी फैसला किया कि बोर्ड को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यदि कोई खिलाड़ी देश के लिए अंतर्राष्ट्रीय मैच नहीं खेल रहा है तो हर हाल में वह घरेलू टीम के लिए खेले। समिति ने इसके अलावा यह फैसला भी किया है कि घरेलू प्रतियोगिताओं में 34 ओवरों के बाद गेंद बदली जाएगी और इनमें पावरप्ले का इस्तेमाल अंतर्राष्ट्रीय नियमों की तरह होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।