चेन्नई, 16 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट के महान खिलाड़ियों में शूमार हो चुके राहुल द्रविड़ को टीम में अपनी वापसी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। द्रविड़ का यह धर्य रंग लाया और लगभग दो वर्षो बाद उन्हें नीली जर्शी पहनने का मौका फिर से नसीब हो गया। टीम में उनकी वापसी से साबित भी हो गया कि चयनकर्ताओं की नजर में वह अभी 'भरोसेमंद' हैं।
चेन्नई में रविवार को जब श्रीलंका दौरे और चैंपियंस ट्राफी के लिए भारतीय टीम का एलान हुआ तो सबकी नजरें इसी ओर थीं कि क्या द्रविड़ को 15 सदस्यी टीम में जगह मिल पाई। परंतु कभी भारतीय टीम की 'दीवार' कहे जाने वाले द्रविड़ और उनके चाहने वालों के लिए खुशखबरी थी।
चयनकर्ताओं ने मुंबई के युवा बल्लेबाज रोहित शर्मा को बाहर का रास्ता दिखाया और इसके बाद बेंगलुरू के द्रविड़ की टीम में वापसी हुई। उनकी यह वापसी दो वर्षो बाद हुई। उन्होंने 14 अक्टूबर, 2007 को अपना आखिरी अंतर्राष्ट्रीय मैच खेला था।
वैसे जीवन के 36 बसंत देख चुके द्रविड़ का आखिरी 10 एकदिवसीय मैचों में प्रदर्शन बेहद साधारण ही रहा। उन्होंने अपने आखिरी 10 मैचों में महज 136 रन बनाए जिसमें सिर्फ एक अर्धशतक शामिल था। संभवत: यही वजह रही कि उन्हें टीम में वापसी के लिए इतना लंबा इंतजार करना पड़ा।
द्रविड़ की वापसी के पीछे एक बड़ी वजह इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में उनका शानदार प्रदर्शन भी रहा है। टीम में उनकी वापसी को मध्यक्रम में एक मजबूती के तौर पर भी देखा जा रहा है। 'श्रीमान भरोसेमंद' और 'मिस्टर कूल' जैसे कई नामों से पुकारे जाने वाले द्रविड़ के लिए बल्लेबाजी क्रम में तीसरा स्थान सटीक माना जाता है।
आज से 13 साल पहले अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने वाले द्रविड़ मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के बाद दूसरे ऐसे भारतीय क्रिकेट हैं जिनके नाम टेस्ट और एकदिवसीय दोनों में 10,000 से अधिक रन दर्ज हैं। द्रविड़ ने अब तक 333 एकदिवसीय मैचों में 39.49 की बेहतरीन औसत से 10,585 रन बनाए हैं जिसमें 12 शतक और 81 अर्धशतक शामिल हैं। उन्होंने 134 टेस्ट मैचों में 52.53 की औसत से 10,823 रन बनाए है। इसमें उन्होंने 26 शतक भी जड़े हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।