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कॉम्पैक कप : भारत-श्रीलंका के बीच फाइनल आज

By Staff

यह मैच जीतकर भारतीय टीम न सिर्फ नए सत्र में अपना पहला खिताब जीतना चाहेगी, बल्कि उसका लक्ष्य शीर्ष वरीय एकदिवसीय टीम की खोई कुर्सी फिर से हासिल करना भी होगा।

शनिवार को इसी मैदान पर खेले गए दूसरे लीग मैच में श्रीलंका से मिली शर्मनाक हार के कारण भारतीय टीम को नंबर-1 एकदिवसीय टीम की कुर्सी से हाथ धोना पड़ा था। यह मुकाम उसने शुक्रवार को न्यूजीलैंड को हराकर हासिल किया था।

भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड को जितने सरल अंदाज में हराया था, श्रीलंका के खिलाफ उसने उतने ही सरल तरीके से मैच गंवा भी दिया। इस मैच के परिणाम से भारत को फाइनल में पहुंचने में कोई दिक्कत नहीं हुई लेकिन उससे सर्वोच्च वरीय एकदिवसीय टीम का 24 घंटे के भीतर ताज छिन गया।

दक्षिण अफ्रीका को एक अंक के अंतर से पछाड़कर पहली बार इस मुकाम तक पहुंचने वाली टीम इंडिया ने एक बार फिर दक्षिण अफ्रीका को यह ताज सौंप दिया। इसे लेकर भारत में टीम की काफी आलोचना हुई और यही कारण है कि खिताबी मुकाबले में जीत हासिल करने और खोया रुतबा फिर से हासिल करने को लेकर महेंद्र सिंह धौनी की टीम पर दबाव बढ़ गया है।

कॉम्पैक कप में प्रदर्शन की बात करें तो श्रीलंका ने अब तक दो मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन किया है। उसने पहले मैच में न्यूजीलैंड को 97 रनों से पराजित किया और फिर दूसरे मैच में भारत को हराकर अजेय स्थिति बनाए रखा।

दूसरी ओर, भारत ने शुक्रवार को खेले गए अपने पहले लीग मैच में न्यूजीलैंड को बेहद रौबदार अंदाज में पराजित किया था लेकिन श्रीलंका के खिलाफ उसकी एक न चली। इसे देखते हुए खिताबी मुकाबले में श्रीलंका का पलड़ा भारी होगा क्योंकि उसने इस श्रृंखला में अजेय स्थिति बनाए रखी है और फिर उसे उसके घर में हराना भारत क्या किसी भी टीम के लिए आसान नहीं।

प्रेमदासा स्टेडियम की पिच पर श्रीलंकाई बल्लेबाजों ने शनिवार को 300 से अधिक रन बनाए और फिर भारत को बड़ी मुश्किल से 150 रनों का आंकड़ा पार करने दिया। यह वही पिच है, जिस पर श्रीलंकाई टीम पहले मैच में 216 रन ही बना सकी थी और न्यूजीलैंड की टीम 159 रनों पर सिमट गई थी।

ऐसे में भारतीय गेंदबाजों को खासतौर पर सावधानी बरतनी होगी। न्यूजीलैंड के खिलाफ शानदार पैनापन दिखाने वाले भारतीय गेंदबाज मेजबान बल्लेबाजों के सामने धारहीन नजर आए थे। ऐसे मौकों पर ही भारत को जहीर खान जैसे अनुभवी गेंदबाज की कमी खलती है।

बल्लेबाजी में भारत को वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर जैसे विशेषज्ञ ओपनरों की कमी खल रही है। दिनेश कार्तिक गंभीर की जगह लेने में नाकाम रहे हैं। ऐसे में सचिन तेंदुलकर का प्रदर्शन भी प्रभावित हो रहा है। टीम प्रबंधन को कार्तिक की जगह विराट कोहली या फिर किसी अन्य बल्लेबाज को ओपनर के तौर पर आजमाना होगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:24 [IST]
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