ब्रिटिश मीडिया की एक रिपोर्ट में बुधवार को यह दावा किया गया कि इंग्लैंड अपने खिलाड़ियों को राष्ट्रमंडल खेलों से दूर रख सकता है क्योंकि उसे डर है कि आतंकवादी उसके एथलीटों को निशाना बना सकते हैं।
खेलों की आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाडी ने भी ऐसी किसी भी प्रकार की आशंकाओं को सिरे से खारिज किया। उन्होंने नई दिल्ली में कहा, "इस खबर में कोई सच्चाई नहीं है। इस संबंध में हमें आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी नहीं दी गई है। यहां तक कि इंग्लैंड के विदेश विभाग और राष्ट्रमंडल खेलों से जुड़े संगठन ने भी बयान जारी कर इस खबर को खारिज किया है।"
उन्होंने कहा, "हाल ही में गृह मंत्रालय में सुरक्षा के संबंध में एक बैठक हुई थी जिसमें सभी राष्ट्रमंडल संगठनों ने संतोष जताया था।"
उधर, लंदन में इंग्लैंड की राष्ट्रमंडल खेलों की टीम के महाप्रबंधक एन. होगबिन ने भी इस खबर को निराधार बताया है। उन्होंने कहा, "ऐसी कोई बात नहीं है। फिलहाल हमारा इरादा सिर्फ यह है कि हम दिल्ली में अगले साल अपनी टीम भेजेंगे।"
इससे पहले लंदन से प्रकाशित समाचार पत्र 'द डेली टेलीग्राफ' ने खबर दी थी कि इंग्लैंड के सुरक्षा अधिकारियों को डर है कि मौजूदा हालात में एथलीटों की सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जा सकती। राष्ट्रमंडल खेलों के लिए इंग्लैंड की लगभग 100 एथलीटों को भेजने की योजना है ताकि वर्ष 2012 के लंदन ओलंपिक के लिए तैयारी की जा सके।
इस अखबार के अनुसार मेट्रोपोलिटन पुलिस आयुक्त पॉल स्टीफेंसन ने इस माह की शुरुआत में ही दिल्ली का दौरा किया था और माना जा रहा है कि उन्होंने नई दिल्ली के सुरक्षा इंतजामों पर 'गंभीर चिंता' व्यक्त की है।
अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया, "अगर आप इंग्लैंड के एथलीट हैं तो इसका यह मतलब नहीं है कि खेलों के लिए जीवन को खतरे में डाल दिया जाए। फिलहाल हमें इस बात की संभावना नहीं दिखती कि इंग्लैंड के एथलीट अगले वर्ष दिल्ली जाएंगे।"
इंग्लैंड के राष्ट्रमंडल खेलों की प्रवक्ता कैरोलीन सियर्ले ने कहा कि उनका संगठन सुरक्षा हालात का जायजा ले रहा है और फिलहाल कोई फैसला नहीं लिया जा सकता।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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