हॉकी विश्व कप: जर्मनी, आस्ट्रेलिया और नीदरलैंड प्रबल दावेदार
नई दिल्ली, 27 फरवरी (आईएएनएस)। इस बार के हॉकी विश्व कप का ताज किस देश के माथे सजेगा, यह सवाल अभी तो भविष्य के गर्त में है, परंतु जर्मनी, आस्ट्रेलिया और नीदरलैंड को इस खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा है।
विश्व कप रविवार से नई दिल्ली में आरंभ हो रहा है और सभी की निगाहें इन तीनों टीमों पर रहेंगी। इन तीनों टीमों के अतीत के प्रदर्शन को देखते हुए ही इनके बारे में यह राय बनी है। बीते चार वर्षो के दौरान इन टीमों का प्रदर्शन बेहतरीन रहा है। इन तीनों टीमों के कई मजबूत पक्ष है तो कुछ इनकी कमजोरियां भी हैं।
जर्मनी की बात करें तो यह टीम वर्ष 2006 के विश्व कप में खेलने वाली टीम से अलग कही जा सकती है। क्योंकि अब टीम में ज्यादातर चेहरे नए हैं। बीते विश्व कप में खेलने वाले सिर्फ तीन खिलाड़ी ही मौजूदा टीम में हैं।
अपने शानदार खेल से 2006 में जर्मनी को विजेता बनाने और 2008 के बीजिंग ओलंपिक में स्वर्ण पदक दिलाने वाले खिलाड़ी क्रिस्टोफर जेलर इस बार जर्मन टीम में नहीं होंगे।
जर्मन हॉकी टीम के बेहतरीन अतीत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह टीम 1973 के बाद हर विश्व कप में शीर्ष की चार टीमों में अपना स्थान बनाने में कामयाब रही है।
आस्ट्रेलियाई टीम भी इस विश्व कप को जीतने का माद्दा रखती है। आस्ट्रेलिया टीम की आक्रमण और रक्षा पंक्ति दोनों मजबूत है। टीम में ऐसे खिलाड़ी हैं जो किसी भी टीम की रक्षा पंक्ति को भेद सकते हैं।
आस्ट्रेलिया टीम ने वर्ष 2009 में चैम्पियंस ट्रॉफी का खिताब जीता था। मौजूदा टीम संतुलित भी नजर आ रही है। इस टीम के बारे में सबसे बड़ी कमजोरी मानिसक स्थिति मानी जाती है। टीम ऐन मौके पर जीता हुआ मैच भी गवां देती है। बीते दो विश्व कप में यह खिताब जीतने की दहलीज तक पहुंचकर सिर्फ इसी वजह से नाकाम रह गई।
इस बार के विश्व कप की तीसरी पंसदीदा टीम नीदरलैंड मानी जा रही है। डच टीम का भी अतीत सुनहरा रहा है। वह अब तक तीन विश्व कप खिताब अपने नाम कर चुकी है। इस टीम की सबसे ज्यादा मजबूती उसके पेनाल्टी कॉर्नर विशेषज्ञ हैं। टीम की जीत बुहत हद तक इन्हीं पर निर्भर करती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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