लाहौर उच्च न्यायालय ने कहा कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों को आईपीएल में न चुनने का निर्णय निजी कंपनियों का था।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति वकार हसन ने कहा कि भारतीय फिल्मों पर प्रतिबंध लगाने का कोई कारण नहीं बनता क्योंकि पाकिस्तानी खिलाड़ियों की उपेक्षा निजी क्रिकेट टीमों के मालिको ने की थी।
एक याचिकाकर्ता ने अपनी अपील में कहा था कि आईपीएल की नीलामी में शामिल हुए 11 पाकिस्तानी खिलाड़ियों में एक को भी न चुने जाने को देखते हुए पाकिस्तान में भारतीय फिल्मों पर प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि आईपीएल के तीसरे संस्करण की नीलामी में किसी भी टीम ने पाकिस्तानी खिलाड़ियों पर बोली नहीं लगाई थी, हालांकि कंपनियों का कहना है कि यह निर्णय व्यावसायिक कारणों से लिया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।