जोरदार दमखम और शानदार खेल दिखाने वाली आस्ट्रेलियाई टीम ने भारतीय उत्साह को धत्ता बताते हुए यह मैच 5-2 के अंतर से जीता। इस विश्व कप में आस्ट्रेलिया की यह पहली जीत है। उसे अपने पहले मुकाबले में इंग्लैंड के हाथों 2-3 से हार झेलनी पड़ी थी।
आस्ट्रेलिया के लिए लिएम डी यंग ने दूसरे मिनट में पहला गोल किया था। इसके बाद 10वें मिनट में ग्लेन टर्नर ने एक और गोल करके मेहमान टीम को 2-0 की बढ़त दिला दी। इस बीच भारतीय टीम ने वापसी के कई प्रयास किए लेकिन दो मैचों का प्रतिबंध झेल रहे फारवर्ड शिवेंद्र सिंह की गैरमौजूदगी में उसका प्रयास असरकारी नहीं रहा।
इसी बीच 26वें मिनट में डेसमंड एबॉट ने एक और गोल करके अपनी टीम को 3-0 की बढ़त दिला दी। इसके बाद भारतीय टीम ने कई जोरदार आक्रमण किए। मध्यांतर की सीटी बजने से नौ सेकेंड पहले विक्रम पिल्लै ने गोल करके भारतीय दर्शकों को उत्साह से भर दिया।
नेशनल स्टेडियम में उस तादाद में तो दर्शक नहीं मौजूद थे जिस तादाद में पकिस्तान के खिलाफ मैच में मौजूद थे लेकिन उनमें अपनी टीम को जीतते देखने का जज्बा बिल्कुल रविवार जैसा था। भारतीय खिलाड़ी जब भी गेंद लेकर आस्ट्रेलियाई खेमे की ओर बढ़ते दर्शकों के शोर से पूरा स्टेडियम गूंज उठता लेकिन आस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को इससे फर्क नहीं पड़ने वाला था। उनके सामने जीत ही एकमात्र मंजिल थी, जिसे वे हर हाल में पाना चाहते थे।
मध्यांतर के बाद दोनों टीमें आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में उतरीं। आक्रामकता की इस लड़ाई में हालांकि आस्ट्रेलियाई टीम आगे रही क्योंकि ल्यूक डोएनरर ने 42वें मिनट में एक और गोल करके उसकी बढ़त 4-1 कर दी। भारतीय टीम अभी इस गोल के सदमे से उबरी भी नहीं थी कि टर्नर ने 43वें मिनट में गोल करके मेहमान टीम को 5-1 से आगे कर दिया।
इस मुकाम पर पहुंचने के बाद भारतीय टीम की जीत की उम्मीद बनाए रखना मुमकिन नहीं था लेकिन इसके बावजूद कप्तान राजपाल सिंह ने आक्रमण पंक्ति की अगुआई करते हुए 53वें मिनट में गोल करके स्कोर को 2-5 कर दिया।
खेल समाप्त होने से छह मिनट पहले भारत के खिलाफ पेनाल्टी स्ट्रोक का फैसला सुनाया गया लेकिन गोलकीपर एड्रियन डिसूजा ने आस्ट्रेलिया का यह प्रयास कामयाब नहीं होने दिया।
आस्ट्रेलिया ने दो गोल पेनाल्टी कार्नर के जरिए किए जबकि भारत को इस मैच में एक भी सफलता नहीं मिली। आस्ट्रेलियाई टीम इंग्लैंड के खिलाफ पेनाल्टी कार्नर पर गोल करने के मामले में बेहद फिसड्डी साबित हुई थी।
इस तरह भारतीय टीम का विश्व कप में आस्ट्रेलिया को हराने का 32 वर्ष पुराना सपना अधूरा रह गया। भारत ने 1978 विश्व कप में आस्ट्रेलिाय पर आखिरी बार जीत हासिल की थी। शानदार दमखम के दम पर कुकाबुरा टीम ने रिक चाल्सवर्थ को जीत का शानदार तोहफा दिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।