नई दिल्ली, 4 मार्च (आईएएनएस)। आधुनिक हॉकी के जानकार भले ही यह मानते हों कि मैच जीतने के लिए पेनल्टी कार्नर एक महत्वपूर्ण हथियार के तौर पर उभरा है लेकिन हॉलैंड के दिग्गज ड्रैग फ्लिकर ताएके ताएकेमा इससे इत्तेफाक नहीं रखते।
ताएकेमा मानते हैं कि आज की तारीख में शॉर्ट कार्नर ज्यादा कारगर हथियार के रूप में उभरे हैं। ताएकेमा के मुताबिक इसके अलावा भी कई अन्य कारक हैं, जो किसी टीम को विजेता बनाने के लिए जरूरी हैं।
हॉकी विश्व कप में हिस्सा लेने पहुंचे ताएकेमा ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा, "पेनाल्टी कार्नर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसके कारण ड्रैग फ्लिकरों की अहमियत बढ़ी है लेकिन पेनल्टी कार्नर को मैच जीतने का सबसे कारगर हथियार नहीं माना जा सकता। इसका कारण यह है कि कोई भी टीम सभी मौकों को भुनाने का दावा नहीं कर सकती।"
सोमवार को अर्जेटीना के खिलाफ शानदार हैट्रिक लगाकर विश्व कप का जोरदार आगाज करने वाले ताएकेमा ने अपनी टीम के हिस्से आए सभी तीन पेनल्टी कार्नरों पर गोल किया था।
ताएकेमा मानते हैं कि पेनल्टी कार्नरों को गोल में बदलने के साथ-साथ टीमों को मैदानी गोल करने के लिए बेहतर रणनीति बनानी होती है। बकौल ताएकेमा, "हॉकी सिर्फ पेनल्टी कार्नर का खेल नहीं है। इसमें शार्ट कार्नर और अच्छे मूव का भी उतना ही अहम योगदान होता है। हॉलैंड की टीम विश्व कप में सिर्फ 50 फीसदी पेनाल्टी कार्नरों को गोल में तब्दील कर पाई है। मैं भी हर बार गोल करने को लेकर आश्वस्त नहीं होता।"
ड्रैग फ्लिक को एक कला मानने वाले ताएकेमा के नाम विश्व कप में 17 गोल करने का रिकार्ड है। वह सर्वाधिक गोल करने के मामले में अपने ही देश के महान खिलाड़ी फ्लोरिस जान बोवलेंडर की बराबरी पर पहुंच चुके हैं। ताएकेमा के मुताबिक वर्षो तक कड़ी मेहनत और अभ्यास के बाद ड्रैग फ्लिक की कला में माहिर हुआ जा सकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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