नई दिल्ली, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। क्रिकेट के 'भगवान' का दर्जा हासिल कर चुके सचिन रमेश तेंदुलकर शनिवार को अपना 37वां जन्मदिन मनाएंगे। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में 30 हजार से अधिक रन और 93 शतक लगा चुके इस महान बल्लेबाज के लिए उम्र का यह पड़ाव महज एक आंकड़ा नजर आता है क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में 20 वर्ष बिताने के बाद भी वह जिस अंदाज में खेल रहे हैं, उसे देखकर नौजवान भी शरमा जाते हैं।
15 नवंबर, 1989 को कराची में महज 16 वर्ष की उम्र में पाकिस्तान के खिलाफ अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर का आगाज करने वाले इस खिलाड़ी के बारे में लोग शुरुआत से ही बढ़-चढ़कर बातें किया करते थे लेकिन उनके गुरु रमाकांत अचरेकर को छोड़कर किसी को भी इस बात की उम्मीद नहीं थी कि यह 'छोटा सा बच्चा' एक दिन इतना बड़ा कद हासिल कर लेगा कि क्रिकेट के सभी कीर्तिमान उसके बल्ले का 'गुलाम' बन जाएंगे।
आधुनिक क्रिकेट के 'सबसे संपूर्ण' बल्लेबाज माने जाने वाले तेंदुलकर का जन्म 24 अप्रैल, 1973 को बम्बई (अब मुंबई) में हुआ था। संकोची और शर्मिले तेंदुलकर ने अपने पहले टेस्ट मैच में मात्र 15 रन बना सके थे। उनका विकेट महान तेज गेंदबाज वकार यूनुस ने लिया था। दूसरी पारी में तेंदुलकर को बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला था।
वह मैच बराबरी पर छूटा था लेकिन तेंदुलकर अपने करियर के आगाज को लेकर खुश नहीं थे। इसी का नतीजा था कि फैसलाबाद में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच की पहली पारी में तेंदुलकर ने 59 रन बनाए। दूसरी पारी में वह आठ रन बना सके लेकिन वहां से उनके बल्ले और गेंदबाजों के बीच जो 'खेल' शुरू हुआ, वह आज तक जारी है।
यह कहने की जरूरत नहीं कि इस खेल में जीत हमेशा तेंदुलकर की ही हुई है क्योंकि कृष्माचारी श्रीकांत की कप्तानी में अपने करियर का आगाज करने वाले इस खिलाड़ी ने अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर के दौरान एक से बढ़कर एक दिग्गज गेंदबाजों का सामना किया और कई महान बल्लेबाजों के साथ प्रतिस्पर्धा की। सबका सफर कहीं न कहीं जाकर खत्म हो गया लेकिन तेंदुलकर अब भी किसी नौजवान बल्लेबाज की तरह हर दिन कुछ नया सीख रहे हैं।
तेंदुलकर 166 टेस्ट मैचों की 271 पारियों में तेंदुलकर अब तक 29 बार नाबाद रहते हुए 13447 रन बना चुके हैं। 248 नाबाद उनका सर्वोच्च व्यक्तिगत योग रहा है। उनके नाम 47 शतक और 54 अर्धशतक दर्ज हैं। वह सर्वाधिक टेस्ट रन और शतक लगाने वाले खिलाड़ी हैं।
एकदिवसीय मैचों में भी तेंदुलकर का रिकार्ड इतना ही गौरवशाली है। 18 दिसंबर, 1989 को अपना पहला एकदिवसीय मैच खेलने वाले तेंदुलकर अब तक 442 मैचों की 'मैराथन पारी' खेल चुके हैं। उनके नाम 17598 रन और 46 शतक दर्ज हैं। वह विश्व के एकमात्र ऐसे बल्लेबाज हैं, जिन्होंने एकदिवसीय मैचों में 200 रनों की व्यक्तिगत पारी खेली है।
तेंदुलकर ने टेस्ट तथा एकदिवसीय मैचों में 100 से अधिक कैच लिए हैं। टेस्ट मैचों में जहां उनके नाम 104 कैच दर्ज हैं वहीं एकदिवसीय मैचो में उन्होंने 134 कैच लपके हैं। एक गेंदबाज के तौर पर भी तेंदुलकर ने कई मौकों पर अपनी उपयोगिता साबित की है। उन्होंने टेस्ट मैचो में जहां अब तक 44 विकेट लिए हैं वहीं गेंद के साथ कई मौकों पर मैच-जिताऊ प्रदर्शन करते हुए उन्होंन एकदिवसीय क्रिकेट में अब तक 154 विकेट चटकाए हैं।
क्रिकेट की सबसे नई विधा 'ट्वेंटी-20' में तेंदुलकर का बल्ला चलने से पहले ही रुक गया। या फिर यूं कहें कि उन्होंने खुद ही रोक लिया। तेंदुलकर ने मात्र एक ट्वेंटी-20 मैच खेला है, जिसमें उन्होंने 12 रन बनाए। ट्वेंटी-20 की सबसे लोकप्रिय प्रतियोगिता-इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में मुंबई इंडियंस टीम की कप्तानी करते हुए तेंदुलकर अब तक 39 मैचों में 1320 रन बटोर चुके हैं।
यह तेंदुलकर के शानदार प्रदर्शन और उनके प्रताप का ही नतीजा है कि मुंबई इंडियंस टीम तीन वर्ष के प्रयास के बाद आईपीएल के फाइनल में जगह बनाने में सफल रही। तेंदुलकर ने आईपीएल-3 में 500 से अधिक रन बटोरे और अपनी टीम के लिए एक प्रेरणादायी कप्तान साबित हुए।
आईपीएल-3 की सफलता का यह नतीजा हुआ कि तेंदुलकर को ट्वेंटी-20 विश्व कप के लिए भारतीय टीम में शामिल करने की मांग उठने लगी। तेंदुलकर ने खुद टीम में शामिल होने से इंकार कर दिया क्योंकि उन्होंने अपना पहला ट्वेंटी-20 मैच खेलने के बाद ही क्रिकेट की इस विधा से संन्यास की घोषणा की थी। तेंदुलकर ने कहा कि वह संन्यास का फैसला वापस नहीं लेंगे।
इस वर्ष 24 फरवरी को ग्वालियर के कैप्टन रूप सिंह स्टेडियम में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तेंदुलकर ने जब 147 गेंदों पर 25 चौकोंे और तीन छक्कों की मदद से 200 रनों की नाबाद पारी खेली, तब पूरा खेल जगत उत्साह से भर गया। तेंदुलकर के कद और क्रिकेट जगत में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान-भारत रत्न से नवाजने की बात होने लगी।
खेल प्रेमी तो इस दौड़ में सबसे आगे थे, राजनीतिक पार्टियों ने भी सरकार से तेंदुलकर को भारत रत्न से नवाजने की मांग कर दी। यह मामला संसद में भी उठा। यहां तक कि 'पहले भारतीय फिर मुंबइकर' मामले पर तेंदुलकर का भारी विरोध करने वाली शिव सेना भी तेंदुलकर को भारत रत्न से नवाजने की मांग की। सोशल नेटवर्किं ग वेबसाइटों के माध्यम से इस विषय पर परिचर्चा होने लगी, जिसमें बहुमत तेंदुलकर के साथ था।
तेंदुलकर ने भारतीय खेल जगत में जो मुकाम हासिल किया है और विज्ञापन बाजार में उनका जो कद आज बन गया है, उसे देखते हुए उन्हें भारत रत्न जैसे अलंकरण की जरूरत नहीं क्योंकि वह तो भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के दिलों के रत्न हैं और किसी देश की अवाम जिसे चाहती और मानती है, उसे किसी ऐसे अलंकरण की जरूरत नहीं होती, जिस पर सरकार की इच्छा या अनिच्छा टिकी हो। तेंदुलकर तो हर हिंदुस्तानी के जिगर का टुकड़ा और क्रिकेट जगत के 'अनमोल रत्न' हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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