आईसीसी ने भले ही तीनों आरोपी खिलाड़ियों को निलंबित कर दिया हो लेकिन पाकिस्तान अब भी यह मानने को तैयार नहीं है कि ये खिलाड़ी दोषी हैं। इसे लेकर लंदन में पाकिस्तानी उच्चायुक्त वाजिद शमसुल हसन ने आईसीसी की आलोचना की है। उच्चायुक्त ने इस फैसले को 'गैरजरूरी' करार दिया है।
आईसीसी ने तीनों खिलाड़ियों को निलंबित करने के 12 घंटे के बाद उनके खिलाफ आपराधिक जांच की बात कही। आईसीसी ने क्रिकेट की साख को बनाए रखने की दिशा में अभूतपूर्व कदम उठाते हुए गुरुवार देर रात तीनों खिलाड़ियों को निलंबित करने की घोषणा की थी। आईसीसी ने अपने बयान में कहा था कि तीनों खिलाड़ियों को भ्रष्टाचार निरोधी अधिनियम के अंतर्गत निलंबित किया जा रहा है।
आईसीसी ने शुक्रवार को लंदन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में साफ कर दिया कि उसने तीनों खिलाड़ियों के निलंबन की आधिकारिक जानकारी खिलाड़ियों और उनके संबद्ध बोर्ड को दे दी है। साथ ही उनसे यह भी कहा कि आरोपी खिलाड़ियों के खिलाफ आपराधिक जांच की जाएगी।
यह पहला मौका है जब आईसीसी ने भ्रष्टाचार निरोधी अधिनियम के अंतर्गत आरोप के घेरे में आए खिलाड़ियों को निलंबित करते हुए आपराधिक जांच करने का फैसला किया है।
आईसीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हारून लोगार्ट ने कहा, "भ्रष्टाचार निरोधी अधिनियम के अंतर्गत स्पॉट फिक्सिंग या मैच फिक्सिंग के आरोपों से घिरे खिलाड़ियों के खिलाफ आपराधिक जांच की जाएगी। इसके पूरा होने तक इन खिलाड़ियों को किसी भी स्तर पर क्रिकेट खेलने की इजाजत नहीं मिल सकती।"
लोगार्ट ने कहा, "हम इस मामले को काफी गंभीरता से ले रहे हैं और दोषी को सामने लाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ा जाएगा। इस बात की जानकारी खिलाड़ियों के साथ-साथ पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को दे दी गई है।"
आईसीसी के फैसले को 'गैरजरूरी' बताते हुए हसन ने कहा, "ऐसे में जबकि इसे लेकर पुलिस जांच जारी है, किसी भी संस्था को इस मामले से फिलहाल दूर ही रहना चाहिए था। खिलाड़ी स्वेच्छा से क्रिकेट से दूर जा चुके हैं, ऐसे में यह फैसला न्यायोचित और वक्त के हिसाब से जायज नहीं है।"
हसन ने कहा उनकी तीनों खिलाड़ियों से बात हुई है। तीनों ने खुद को निर्दोष करार दिया है। हसन ने कहा, "जो कुछ हो रहा है उससे तीनों बहुत परेशान हैं। इस स्थिति में खेल पर ध्यान लगा पाना नामुमकिन है। उन्होंने साफ किया है कि वे निर्दोष हैं और जांच पूरी होने तक टीम से दूर ही रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि बिना कारण के उन्हें मानसिक तौर पर परेशान किया जा रहा है।"
पाकिस्तान ने खिलाड़ियों को दोषी मानने के बजाय इस संबंध में सारा आरोप परोक्ष रूप से भारतीय सटोरियों पर मढ़ा है।
हसन ने इस संबंध में आईसीसी के संवाददाता सम्मेलन से पहले समाचार चैनल 'एनडीटीवी' के साथ बातचीत के दौरान कहा, "इस मामले में आरोपी मजहर माजिद ने कुछ एशियाई सटोरियों की मदद से तीनों खिलाड़ियों को फंसाया है।"
हसन ने कहा कि ब्रिटिश मीडिया कह रहा है कि इस मामले में शामिल सटोरिए एशियाई हैं लेकिन अगर वे पाकिस्तानी हैं तो ब्रिटिश मीडिया ने उन्हें साफ तौर पर पाकिस्तानी कहकर पुकारा होता। ऐसे में यह साफ है कि इस मामले में भारतीय सटोरिए शामिल हैं।
हसन ने यह भी मानने से इंकार कर दिया कि तीनों आरोपी खिलाड़ियों को स्पॉट फिक्सिंग के आरोपों के कारण ही टीम से हटाया गया है। उन्होंने कहा कि तीनों ने खुद ही श्रृंखला से दूर रहने का फैसला किया है।
सलमान बट्ट के सामान से मिली नकदी :
इस बीच, ब्रिटेन के समाचार पत्र 'डेली मेल' ने खबर दी है कि मैच फिक्सिंग की घटना को सामने लाने वाले स्टिंग ऑपरेशन में जिस नकदी को मुख्य आरोपी मजहर माजिद के हाथ में दिखाया गया था, वह कथित तौर पर बट्ट के सामान में से मिली है।
पत्र के मुताबिक स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस ने जांच के दौरान बट्ट के सामान से वह नकदी बरामद की है और इस मामले में वह शुक्रवार को बट्ट के साथ पूछताछ करेगी। पुलिस का कहना है कि कुछ नकदी लॉर्ड्स स्टेडियम में स्थित बट्ट के लॉकर से भी मिली है।
स्कॉटलैंड यार्ड को अंदेशा है कि यह नकदी उस 150,000 पाउंड का हिस्सा हो सकती है, जिसे माजिद को समाचार पत्र 'न्यूज ऑफ द वर्ल्ड' के संवाददाता से लेते हुए स्टिंग ऑपरेशन में दिखाया गया था। इसी स्टिंग ऑपरेशन के आधार पर बट्ट सहित तीन खिलाड़ियों पर मैच फिक्सिंग की जांच चल रही है।
माजिद ने समाचार पत्र से दावा किया था कि कप्तान सलमान बट्ट सहित कई खिलाड़ी उसकी मुट्ठी में हैं और वह पैसे के दम पर पाकिस्तानी खिलाड़ियों को लॉर्ड्स टेस्ट मैच में नो-बॉल फेंकने के लिए तैयार कर सकता है। माजिद का दावा ठीक निकला और उसके बताए गए क्षण में ही पाकिस्तानी तेज गेंदबाज मोहम्मद आसिफ और मोहम्मद आमेर ने नो-बॉल फेंकी थी।
माजिद ने कहा था कि बट्ट को इस फिक्सिंग की पूरी जानकारी है। आईसीसी ने इस संबंध में कहा कि वह जांच की रिपोर्ट आने तक प्रतिक्रिया जाहिर नहीं करेगा लेकिन खिलाड़ियों को निलंबित करने और उनके खिलाफ आपराधिक जांच कराने का फैसला भ्रष्टाचार निरोधी इकाई के मुख्य परिचालन अधिकारी रवि सावानी और लंदन के मेट्रोपॉलिटन पुलिस के वित्तीय अपराध शाखा के अधिकारियों से मुलाकात के बाद किया गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।