बीसीसीआई ने भ्रष्टाचार के आरोपों के मद्देनजर मोदी के खिलाफ सुनवाई के लिए अनुशासनात्मक समिति का गठन किया है लेकिन मोदी ने यह कहते हुए इस समिति के फिर से गठन की मांग की थी कि वह समिति में अरुण जेटली और चिरायु अमीन को शामिल नहीं देखना चाहते। मोदी ने दलील दी थी कि अमीन और जेटली उनके प्रति पूर्वग्रह से ग्रसित हैं।
इस संबंध में मोदी की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश मोहित शाह और न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने साफ कर दिया कि समिति में बदलाव की मोदी की मांग नहीं मानी जा सकती।
अदालत ने हालांकि यह भी कहा कि अगर मोदी यह मानते हैं कि समिति के कुछ सदस्य उनके प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित हैं तो वह इस संबंध में समिति के अंतिम चरण के फैसले को चुनौती दे सकते हैं।
बीसीसीआई के प्रशासनिक अधिकारी रत्नाकर शेट्टी ने अदालत के इस फैसले पर प्रसन्नता जाहिर की। शेट्टी ने कहा, "हम इस बात को लेकर खुश हैं कि अदालत ने मोदी को कोई राहत नहीं दी। समिति अपना काम करती रहेगी। इस मामले में गवाहों की सूची बन चुकी है और जल्द ही इस पर अगली बैठक होगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।