राष्ट्रमंडल खेल (हॉकी) : इतिहास बनाने उतरेगी भारतीय टीम
नई दिल्ली, 13 अक्टूबर (आईएएनएस)। देश में हॉकी का मक्का कहे जाने वाले मेजर ध्यानचन्द स्टेडियम में बुधवार को मेजबान भारत और तीन बार के चैम्पियन आस्ट्रेलिया के बीच खिताबी मुकाबला खेला जाएगा। भारतीय टीम पहली बार फाइनल में पहुंची है जबकि आस्ट्रेलियाई टीम लगातार चौथी बार खिताबी मुकाबले के लिए उतरेगी।
भारत के सामने इतिहास बनाने का मौका है जबकि आस्ट्रेलियाई टीम लगातार चौथी बार अपनी बादशाहत कायम करने का प्रयास करेगी। भारत ने 1998 में पहली बार हॉकी स्पर्धा में हिस्सा लिया था। 2002 में वह राष्ट्रमंडल खेलों में नहीं खेल सकी जबकि 2006 में उसे चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा था।
इसके उलट आस्ट्रेलिया ने सभी चार संस्करणों में हिस्सा लिया और तीन बार चैम्पियन रही। इस लिहाज से भारत के लिए पहली बार खिताब पर कब्जा कर पाना मुश्किल लग रहा है क्योंकि आस्ट्रेलिया मौजूदा विश्व चैम्पियन भी है और पिछले दो मुकाबलों में भारत को बुरी तरह पराजित कर चुका है।
पूल-ए के ग्रुप मुकाबले में आस्ट्रेलिाय ने भारत को 5-2 से मात दी थी। इससे पहले इस वर्ष मार्च में भारत में खेले गए विश्व कप के दौरान आस्ट्रेलिया ने भारतीय दर्शकों के सामने उनकी टीम को 5-2 के अंतर से ही पराजित किया था।
एक बात भारत के पक्ष में जाती है और वह यह है कि उसे अपने घरेलू दर्शकों के सामने खेलना है, जो पिछले कुछ मैचों से जबरदस्त जोश में हैं। खासतौर पर पाकिस्तान के साथ खेले गए पूल-ए के अंतिम लीग मुकाबले में भारतीय दर्शकों ने जबरदस्त उत्साह के साथ अपनी टीम का समर्थन किया था। वह मुकाबला भारत के लिए करो या मरो का था और उसमें भारत ने पाकिस्तान को 7-4 से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी।
इसके बाद भारत का सामना यूरोपीयन चैम्पियन इंग्लैंड के साथ हुआ। दोनों टीमों के बीच जोरदार संघर्ष हुआ लेकिन जीत भारत की हुई। यह जीत भले ही पेनाल्टी शूटआउट के माध्यम से मिली हो लेकिन भारत इसका असली हकदार था क्योंकि मध्यांतर के बाद 1-3 से पिछड़ने के बाद उसने जबरदस्त वापसी करते हुए स्कोर 3-3 किया था।
इंग्लैंड और पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय अग्रिम पंक्ति ने शानदार खेल दिखाया था और आस्ट्रेलिया के खिलाफ भी उसे अपना यह प्रदर्शन जारी रखना होगा। रक्षापंक्ति में थोड़ी नरमी पिछले मुकाबलों में दिखी लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ पेनाल्टी शूट रोकने के बाद गोलकीपर भारत चेतरी के हौसले बुलंद हैं और वह इस कमी की काफी हद तक भरपाई कर सकते हैं।
इस मुकाबले को जीतने के लिए भारतीय खिलाड़ियों को दमखम बनाए रखने के साथ-साथ अनुशासन की डोर थामे रखनी होगी। इंग्लैंड के खिलाफ मिली जीत के बाद कोच ब्रासा ने टीम के कई खिलाड़ियों को डांट लगाई थी क्योंकि उन्होंने अनुशासन की सीमा लांघने की कोशिश की थी। आस्ट्रेलिया के खिलाफ जीत हासिल करने के लिए अनुशासन जितना जरूरी है उतना ही जरूरी दमखम है।
आस्ट्रेलियाई टीम मैदान में भाग-दौड़ के लिए काफी मशहूर है। उसके खिलाड़ी थकना नहीं जानते। खेल के पहले मिनट से लेकर अंतिम मिनट तक उनके उत्साह में इंच भर कमी नहीं आती। ऐसे में भारतीयों को भी इसी ढर्रे पर चलना होगा क्योंकि जरा सी चूक भी भारत के इतिहास बनाने की राह में रोड़ा बन सकती है।
सबसे अहम बात यह है कि पाकिस्तान और इंग्लैंड के साथ खेले गए मुकाबलों की तरह फाइनल में भी भारत को अपने घरेलू दर्शकों का भरपूर सहयोग मिलेगा। दर्शकों का सहयोग किसी खिलाड़ी और टीम में उत्साह भर देता है जबकि कई मौकों पर विपक्षी खिलाड़ी इससे हतोत्साहित भी हो जाते हैं। ऐसे में भारतीय खिलाड़ियों को दर्शकों से मिलने वाले सहयोग का भरपूर फायदा उठाना होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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