नई दिल्ली, 10 जून (आईएएनएस)। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का नशा अभी पूरी तरह से उतरा नहीं है। सात हफ्तों तक चले इस प्रतियोगिता में कई बेहतरीन खिलाड़ियों को राष्ट्रीय खिलाड़ी के रूप में जहां अपनी खास पहचान बनाने का मौका मिला है, वहीं सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस खेल में किसने कितने पैसे कमाए।
नई दिल्ली, 10 जून (आईएएनएस)। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का नशा अभी पूरी तरह से उतरा नहीं है। सात हफ्तों तक चले इस प्रतियोगिता में कई बेहतरीन खिलाड़ियों को राष्ट्रीय खिलाड़ी के रूप में जहां अपनी खास पहचान बनाने का मौका मिला है, वहीं सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस खेल में किसने कितने पैसे कमाए।
कुछ आलोचकों और अर्थशास्त्रियों का कहना है कि शाहरुख खान ने पहले सत्र में अकेले ही पैसे बनाए। यही कारण है कि इस टीम को 'कोलकाता नाइट राइडर्स' (केकेआर) के बजाए शाहरुख की टीम कहना बेहतर लगता है। कोई आश्चर्य नहीं होगा यदि शाहरुख निकट भविष्य में अपना आईपीओ ले आएं।
अन्य टीमों के मालिक जहां अतिरिक्त खर्चो और विभिन्न मंत्रालयों से मिलने वाली छूट हासिल नहीं हो पाने की चर्चा करते रहे, वहीं शाहरुख ने अपनी सामथ्र्य पर ही ध्यान केंद्रित रखा। एक बार हंसते हुए उन्होंने यह भी कह दिया कि यदि जरूरत पड़ी तो अपनी टीम के लिए वे कुछ और डांस करने से भी नहीं चूकेंगे।
जहां सबलोग दर्शकों को आकृष्ट करने के लिए शाहरुख की एक फिल्म के शीर्षक गीत 'चक दे इंडिया' का सहारा ले रहे थे, वहीं खुद शाहरुख प्रचार के नए-नए रास्ते अपना रहे थे।
आईपीएल मैच ने शेन वाटसन, यूसुफ पठान और मनप्रीत गोनी जैसे खिलाड़ियों को एक नई पहचान दी है। हालांकि वे नए खिलाड़ी नहीं थे, लेकिन उन्हें उनकी सही जगह नहीं मिल पा रही थी। आईपीएल ने उन्हें वह जगह ही नहीं, बल्कि क्रिकेट जगत में खास पहचान भी दिलाई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।