सोमवार को सनम सिंह के साथ पुरुषों के युगल मुकाबलों का स्वर्ण जीतने वाले सोमदेव ने मंगलवार को खेले गए खिताबी मुकाबले में विश्व के 44वें वरीयता प्राप्त उज्बेकिस्तान के खिलाड़ी डेनिस इस्तोमिन को 6-1, 6-2 से पराजित कर भारत को सातवां स्वर्ण पदक दिलाया। यह मुकाबला एक घंटे 22 मिनट चला।
सोमेदेव के शानदार खेल की बदौलत भारत ने टेनिस में दूसरा स्वर्ण हासिल किया है। इसके अलावा टेनिस में भारत को दो कांस्य और एक रजत पदक प्राप्त हुआ है। सानिया मिर्जा ने एकल में कांस्य जीता था जबकि सोमदेव की अगुआई में भारतीय पुरुष टीम को भी कांस्य प्राप्त हुआ था। इसके अलावा सानिया और विष्णु वर्धन की जोड़ी ने सोमवार को मिश्रित युगल वर्ग में रजत पदक जीता था।
सोमदेव सोमवार को एशियाई खेलों की टेनिस स्पर्धा के एकल मुकाबलों के फाइनल में पहुंचने वाले पहले खिलाड़ी बने थे। इस लिहाज से उन्होंने सोमवार को ही कम से कम रजत पदक अपने नाम कर इतिहास रच दिया था। इससे पहले भारत को टेनिस एकल में तीन कांस्य प्राप्त हुए हैं।
1994 के हिरोशिमा एशियाई खेलों में लिएंडर पेस ने कांस्य जीता था जबकि 1998 के बैंकॉक एशियाई खेलों में महेश भूपति ने भी कांसा जीता था। इसके अलावा 1998 के बैंकॉक एशियाई खेलोंे में ही भारत के प्रह्लाद श्रीनाथ ने कांस्य पदक जीता था।
चीन में दो स्वर्ण जीतकर सोमदेव ने लिएंडर की बराबरी की। लिएंडर ने 2006 में कतर की राजधानी दोहा में आयोजित 15वें एशियाई खेलो में दो स्वर्ण हासिल किए थे। लिएंडर ने महेश भूपति के साथ युगल और सानिया के साथ मिश्रित युगल का स्वर्ण जीता था। सानिया ने दोहा में रजत पदक हासिल किया था जबकि महिला टीम को भी रजत प्राप्त हुआ था।
भारत के लिए यह मुकाम हासिल करना बेहद खास है क्योंकि उसके तीन सबसे बड़ी खिलाड़ी लिएंडर, भूपति और रोहन बोपन्ना इन दिनों वल्र्ड टूर में खेलने में व्यस्त हैं और इस कारण इन तीनों ने एशियाई खेलो में हिस्सा नहीं लिया।
तीन बड़े खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी में टीम की अगुआई कर रहे सोमदेव ने प्रेरणा का स्रोत बनते हुए न सिर्फ अपनी टीम को कांस्य दिलाया बल्कि युगल और एकल में स्वर्ण जीतकर अपेक्षा से अधिक बेहतर प्रदर्शन किया। महिला वर्ग में सानिया ने एकल में निराश किया लेकिन मिश्रित युगल में उनका तथा विष्णु का प्रयास सराहनीय रहा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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