गाजियाबाद, 3 दिसम्बर (आईएएनएस)। हरियाणा की रणजी क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान जोगिंदर शर्मा को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेले तीन वर्ष से अधिक हो चुके हैं लेकिन इसके बावजूद वह अब भी टीम इंडिया में वापसी के लिए की उम्मीद बनाए हुए हैं।
मोहन मेकिन्स मैदान पर शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के छह बल्लेबाजों को पेवेलियन लौटने वाले जोगिंदर को अब भी उम्मीद है कि टीम इंडिया के रास्ते उनके लिए बंद नहीं हुए हैं और बेहतर प्रदर्शन उन्हें एक बार फिर भारतीय टीम में शामिल करा सकता है।
जोगिंदर ने कुल सात विकेट लेकर इस इलीट ग्रुप के मुकाबले में अपनी टीम की जीत तय की। वह मानते हैं कि उन्होंने हमेशा यही मानकर मैदान का रुख किया है कि उन्हें टीम इंडिया में वापसी करनी है।
जोगिंदर ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "मेरा पहला लक्ष्य टीम इंडिया में वापसी है। रणजी मैचों में अच्छा खेलकर मैं चयनकर्ताओं को प्रभावित कर सकता हूं। जहां तक फिटनेस की बात है तो मैं इसके लिए जोरदार मेहनत कर रहा हूं।"
जोगिंदर ने अपना आखिरी अंतर्राष्ट्रीय एकदिवसीय मैच 24 जनवरी, 2007 को कटक में वेस्टइंडीज के साथ खेला था जबकि उनका आखिरी ट्वेंटी-20 मैच 24 सितम्बर 2007 को जोहांसबर्ग में पाकिस्तान के साथ हुआ था।
यह वही मैच था, जिसने जोगिंदर को शोहरत दिलाई थी। मिस्बाह उल हक को ट्वेंटी-20 विश्व कप के फाइनल में डीपफाइन लेग में शांताकुमारन श्रीसंत के हाथों कैच कराकर जोगिंदर ने भारत को पहला ट्वेंटी-20 विश्व खिताब दिलाया था।
चार ट्वेंटी-20 और कुल चार एकदिवसीय मैच खेलने वाले जोगिंदर को उसके बाद हालांकि टीम इंडिया में मौका नहीं मिला। आज वह मानते हैं कि प्रतिस्पर्धा बहुत कठिन है लेकिन वह उम्मीद नहीं छोड़ेंगे।
रोहतक निवासी जोगिंदर ने कहा, "टीम इंडिया के रास्ते बहुत कठिन हो गए हैं लेकिन एक खिलाड़ी कभी भी आस नहीं छोड़ता। पार्थिव पटेल छह वर्ष के बाद टीम इंडिया में वापसी कर सकते हैं तो फिर मैं क्यों नहीं कर सकता।
उम्र अभी भी मेरे साथ है। अपनी टीम को इलीट ग्रुप के नॉकआउट दौर तक पहुंचाना मेरा लक्ष्य है। टीम को शोहरत मिलेगी तो खिलाड़ी भी शोहरत पाएंगे और चयनकर्ताओं की निगाह में आएंगे। इसी उम्मीद के साथ मैं मैदान में उतरता हूं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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