बापू ने यह भी कहा कि तेंदुलकर को गेंदबाजी कराते वक्त उनकी रणनीति भी नाकाम हो जाती। नादकर्णी ने कहा, "महान खिलाड़ी पैदा नहीं होते बल्कि तैयार किए जाते हैं। जहां तक तेंदुलकर की बात है तो वह क्रिकेट जगत के भगवान हैं।"
यह पूछे जाने पर कि अगर उन्हें तेंदुलकर के सामने गेंद फेंकने का मौका मिलता तो क्या होता, नादकर्णी ने कहा, "ऐसे कद के खिलाड़ी के लिए मेरे पास कोई तय रणनीति नहीं है। ज्यादा से ज्यादा मैं उनसे यह कह सकता हूं कि वह गलतियां करें, जिससे कि उनका विकेट मुझे मिल सके।"
नादकर्णी को विश्व क्रिकेट के सबसे प्रतिभाशाली स्पिनरों में एक माना जाता है। उनकी गेंदों को खेलना एक समय बल्लेबाजों के लिए टेढ़ी खीर थी। नादकर्णी ने भारत के लिए 1955 से 1968 तक कुल 42 टेस्ट मैच खेले और 88 विकेट झटके।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।