मनीष के अलावा भारतीय अंडर-19 टीम के पूर्व कप्तान अम्बाती रायडू, राजस्थान रायल्स के लिए खेल चुके सिद्धार्थ त्रिवेदी, राजस्थान रॉयल्स के ही अभिषेक झुनझुनवाला और मुम्बई इंडियंस के राजगोपाल सतीश जैसे युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ी भी नीलामी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होंगे।
आईपीएल गर्वर्निग कांउसिल द्वारा दिसम्बर में जारी किए गए दिशा-निर्देशों के मुताबिक आईपीएल के चौथे संस्करण में उन्हीं खिलाड़ियों के लिए बोली लगाई जाएगी जिन्होंने या तो भारत के लिए खेला हो या फिर आईपीएल के तीसरे संस्करण में अपनी टीम की ओर से 75 फीसदी मैच खेले हों।
मनीष ने डेक्कन चार्जर्स के खिलाफ सेंचुरियन में 73 गेंदों पर नाबाद 114 रन बनाए थे। रायडू और सतीश मुम्बई इंडियंस की ओर से खेले हैं जबकि सिद्धार्थ और झुनझुनवाला राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेले हैं।
आईपीएल की सफलता के माध्यम से कई गुमनाम खिलाड़ी सुर्खियां बटोरकर भारतीय टीम तक का सफर तय कर चुके हैं। इनमें राजस्थान रॉयल्स के यूसुफ पठान, मुम्बई इंडियन के सौरव तिवारी और कोलकाता नाइट राइर्ड्स के वृद्धिमान साहा जैसे कई नाम हैं। पांडेय ने भी पहले शतक के माध्यम से भारतीय टीम का दरवाजा खटखटाया था लेकिन उम्र कम होने के कारण उन्हें मौका नहीं मिल सका था।
अब जबकि पांडेय आईपीएल-4 की बोली से बाहर हो चुके हैं, उन्हें भारतीय टीम में जगह बनाने के लिए नए सिरे से रणजी और अन्य घरेलू मैचों में अच्छा प्रदर्शन करना होगा। मौजूदा रणजी सत्र में पांडेय का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है लेकिन उनके जैसे कई अन्य खिलाड़ी हैं जो आईपीएल के माध्यम से भारतीय टीम में शामिल होने का सपना पाले हुए हैं। ऐसे सभी खिलाड़ियों को गवर्निग काउंसिल के इस फैसले ने झटका दिया है।
काउंसिल के इस फैसले से फ्रेंचाइजी टीमों को भी नुकसान हुआ है क्योंकि घरेलू क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ियों को अपने साथ जोड़कर वे सस्ते में अपनी टीम के संयोजन को बेहतर करती रही हैं। इसका कारण यह है कि घरेलू स्तर पर खेलने वाले खिलाड़ी उन्हें सस्ते में मिल जाते हैं और साथ ही साथ उन्हें किसी तरह की प्रतिबद्धता भी नहीं रहती औ इस कारण वे पूरे समय टीम के साथ रहते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।