भारत ने न सिर्फ ग्रुप-बी में जीत के साथ खाता खोला है बल्कि उसने बांग्लादेश से 2007 विश्व कप के पहले मैच में मिली हार का हिसाब भी बराबर कर लिया।
2003 विश्व कप का फाइनल खेलने वाली भारतीय टीम बांग्लादेश के हाथों मिली हार के बाद अपने अगले मैच में श्रीलंका से हारकर विश्व कप से बाहर हो गई थी।
भारत ने बांग्लादेश के सामने 371 रनों का विशाल लक्ष्य रखा था। जवाब में बांग्लादेश ने तमीम इकबाल (70), इमरुल कायेस (34), जुनैद सिद्दीकी (37) और कप्तान शाकिब अल हसन (55) की अच्छी पारियों के बावजूद निर्धारित 50 ओवरों की समाप्ति के बाद नौ विकेट पर 283 रन ही बना सकी।
भारत की ओर से मुनाफ पटेल ने सर्वाधिक चार विकेट झटके जबकि जहीर खान को दो सफलता मिली। हरभजन सिंह और यूसुफ पठान को भी एक-एक विकेट मिला।
इससे पहले, टॉस हारने के बाद बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने निर्धारित 50 ओवरों की समाप्ति पर चार विकेट के नुकसान पर 370 रन बनाए थे। भारत के लिए वीरेंद्र सहवाग ने 175 रनों की शानदार पारी खेली जबकि विराट कोहली 100 रन बनाकर नाबाद रहे।
सहवाग अपने एकदिवसीय करियर का 14वां और विश्व कप का दूसरा शतक लगाने में सफल रहे। यह उनका सर्वोच्च व्यक्तिगत योग है। कोहली ने अपने पहले विश्व कप मुकाबले में शतक लगाया।
इसके अलावा सर्वाधिक एकदिवसीय मैच खेलने का रिकार्ड अपने नाम करने वाले सचिन तेंदुलकर ने 28 और गौतम गम्भीर ने 39 रनों का योगदान दिया। यूसुफ पठान (8) पारी की अंतिम गेंद पर आउट हुए।
मीरपुर में यह किसी भी टीम का सर्वोच्च योग है। साथ ही विश्व कप में भारत का यह तीसरा और सभी टीमों के बीच पांचवां सर्वश्रेष्ठ योग है।
भारत को अपना दूसरा मैच 27 फरवरी को बेंगलुरू के चिन्नास्वामी स्टेडियम में इंग्लैंड के साथ खेलना है। यह मैच कोलकाता के ईडन गरडस स्टेडियम में खेला जाना था लेकिन निर्माण कार्य पूरा नहीं होने के कारण इसे बेंगलुरू स्थानांतरित कर दिया गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।