Asian Games 2018 : एशियाड के 15 गोल्ड जीतने वाले एथलीटों की अनसुनी कहानियां

By गौतम सचदेव
stories of struggle and triumph

नई दिल्ली। भारत ने एशियन गेम्स में कुल 69 पदक जीते जो भारतीय एथलीटों का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इससे पहले भारत ने साल 2010 में 65 पदक जीते थे। भारतीय टीम ने 14 दिनों तक चले मल्टी-स्पोर्टिंग इवेंट की अलग-अलग कैटेगरी में 15 गोल्ड, 24 सिल्वर और 30 ब्रॉन्ज़ समेत कुल 69 पदक जीत कर एशियाड इतिहास में साल 1951 के स्वर्ण पदक जीतने के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। भारतीय एथलीटों ने अपने पिछले एशियाड (2014) के मुकाबले सोने की एक अलग चमक बिखेरी तो चांदी जैसी सादगी से प्रदर्शन में चार चांद भी लगाए।

खिलाड़ियों के प्रदर्शन में तांबे जैसा तजुर्बा भी था और हर प्रतिभागी के खेल में हौसले की एक नई उड़ान भी। यही वजह थी कि आज हम उन खिलाड़ियों का भी नाम गर्व से ले रहे हैं जिन्होंने कर्ज के पैसे से ट्रेनिंग कर गोल्ड जीता और उस युवा धाविका के जज्बे को भी सलाम कर रहे हैं जिनके पैरों में कुछ महीने पहले तक ट्रेनिंग के जूते भी नहीं थे। उनके मेडल जीतते ही उनकी उपलब्धियों के साथ 'देश की बिटिया' और 'म्हारा छोड़ा' या फिर 'देश के लिया जीता मेडल' जैसे शब्द फेवीक्विक की तरह जुड़ जाते हैं। ये शब्द कटु हो सकते हैं लेकिन सत्य हैं। कहानी हौसले की मिट्टी, मेहनत और त्याग की भट्टी में तपे उन 15 खिलाड़ियों की जिन्होंने गोल्ड जीत अपनी अलग पहचान बनाई। अक्सर सफलताओं की चकाचौंध वाली रोशनी में हमारी आँखें चौंधिया जाती है और उस सफलता के पीछे त्याग, तपस्या, बलिदान और समर्पण की कहानी समोसे खाने के बाद फेंके गए कागज की तरह कूड़े के ढेर में छिप जाती है।

1st GOLD : 'पॉकेट डाइनामाईट' ने दिलाया पहला गोल्ड

1st GOLD : 'पॉकेट डाइनामाईट' ने दिलाया पहला गोल्ड

भारत में जब भी खेल की बात आती है एक चीज मानो तय लगता है। इस देश के एथलीट विषम परिस्थितियों से निकलने में माहिर हैं और दुनिया की तमाम चुनौतियों को पार कर जीतने का हुनर जानते हैं। ऐसी ही कहानी है एशियाड के पहले दिन पहला गोल्ड जीतने वाले बजरंग पुनिया की। सुशील कुमार के फर्स्ट राउंड में एग्जिट के बाद सबकी निगाहें इस 'पॉकेट डाइनामाईट' पर थी और इन्होंने निराश नहीं किया। भारत के सबसे फिट,चपल, चालाक और चतुर एथलीट ने हाल के दो वर्षों में एक से एक पहलवान को धोबी पछाड़ दिया है। 65 किलोग्राम वर्ग के फ्रीस्टाइल कुश्ती में फाइनल की जंग ऐसी लग रही थी जैसे नेवले और सांप की लड़ाई हो और परिणाम तय हो। हरियाणा के इस खिलाड़ी ने फाइनल में जापान के दईची तकतानी को 11-8 से मात दी और भारत को एशियाड-2018 का पहला गोल्ड मेडल दिलाया। महज पहले 80 सेकेंड के खेल में इन्होंने प्रतिद्वंदी पर 8-0 की बढ़त बना ली थी। पुनिया के पिता बलवान सिंह पुनिया भी रेसलर थे लेकिन आर्थिक तंगी की वजह से उन्होंने खेल छोड़कर अपना परिवार चलाने के लिए खेती करने का फैसला लिया। उन्होंने जिस बेटे के लिए अपने सपनों की तिलांजलि दी उसने उन्हें निराश नहीं किया और एक के बाद एक कई मेडल जीते। पिछले चार सालों में इन्होंने अपनी सफलता की किताब में उप्लब्धियों के कई नए पन्ने जोड़े जिसमें इंचिओन एशियन गेम्स में सिल्वर और ग्लासगो कॉमन वेल्थ गेम्स और सीनियर एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में भी सिल्वर शामिल है। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा है कि साल 2020 में होने वाले ओलंपिक में भी वो भारत के लिए गोल्ड से खाता खोलना चाहते हैं।

2nd GOLD : दंगल गर्ल विनेश बनीं गोल्डन गर्ल

2nd GOLD : दंगल गर्ल विनेश बनीं गोल्डन गर्ल

'दंगल' वाले फोगाट परिवार से ताल्लुक रखने वाली विनेश फोगाट ने 50 किलोग्राम वर्ग के फाइनल मुकाबले में अपनी जापानी प्रतिद्वंद्वी यूकी इरीए को 6-2 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। उन्होंने यह मुकाबला जीतते ही इतिहास रच दिया और एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारत की पहली महिला पहलवान बन गईं। इससे पहले फोगाट ने 2014 के एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। उन्होंने ग्लासगो और गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में भी लगातार सोना जीता था। एशियाड में भारत के लिए दूसरा गोल्ड मेडल था। विनेश के लिए यह जीत इतनी आसान नहीं थी। जब वो महज 8 साल की थीं जब उनके पिता राजपाल सिंह फोगाट की मौत कैंसर से हो गई। सबसे पहले तो इस शख्स की तारीफ होनी चाहिए जिन्होंने आज से 16 साल पहले हरियाणा जैसी जगह में अपनी बेटी को दंगल में उतारा और इसे ही करियर माना। अपने भाई के सपनों को साकार किया महावीर सिंह फोगाट ने जिन्होंने अपनी बेटियों गीता और बबीता को रेसलर बनाया। विनेश पर दुखों का पहाड़ तब टूट पड़ा था जब इनके सर से पिता का साया छिनने के बाद इनकी मान प्रेमलता को भी कैंसर हो गया। वो कीमोथेरेपी के लिए रोहतक आती थी और यह सुनिश्चित किया कि उनकी बीमारी का असर विनेश के खेल पर कभी न पड़े। चैंपियन कोच के कंधे पर बहुत अच्छे दिखते हैं, उनकी मुस्कान दुनिया को प्यारी लगती है लेकिन उनके सफलता के पीछे कई दर्द भरी कहानियां भी छिपी होती हैं।

3rd GOLD : 16 साल के सौरभ ने सोने पर साधा निशाना

3rd GOLD : 16 साल के सौरभ ने सोने पर साधा निशाना

निशानेबाजी की 10 मीटर एयर पिस्टल प्रतिस्पर्धा में भारत के सौरभ चौधरी ने स्वर्ण पदक जीतकर सनसनी मचा दी। अपने पहले ही एशियाड में उन्होंने इस खेल के इतिहास में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में अंकित करवा लिया। पढ़ाई में कम दिलचस्पी होने की वजह से सौरभ ने शूटिंग की ओर ध्यान लगाया और इसे ही अपना करियर बनाने का फैसला किया। सौरभ गणित में काफी कमजोर हैं लेकिन निशाने के पक्के हैं। एशियाड-2018 की निशानेबाजी प्रतियोगिता में ये भारत का पहला स्वर्ण पदक था। इससे पहले उन्होंने जर्मनी में हुए शूटिंग जूनियर वर्ल्ड कप में गोल्ड मेडल जीता था। इन खेलों के दौरान उन्होंने वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया था। जून में आयोजित इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट फेडरेशन के मैच में भी 10 मीटर एयर पिस्टल खेलों में उन्हें 243.7 अंक मिले थे।

4th GOLD : शूटिंग में सोना जीतनेवाली पहली महिला खिलाड़ी

4th GOLD : शूटिंग में सोना जीतनेवाली पहली महिला खिलाड़ी

राही सरनोबत ने शूटिंग में भारत के लिए दूसरा स्वर्ण पदक जीता। सफलता की चमक इतनी चकाचौंध समेटे होती है कि हम इसकी चकभक करती रोशनी में कभी-कभी इसके पीछे की मेहनत नहीं देख पाते हैं। राही की कहानी एक ऐसी ही मिसाल है। साल 2015 में इनके पर्सनल कोच अनातोली पिदुबनी की मौत हो गई और एल्बो में चोट लगने के बाद पिछले तीन साल से खराब फॉर्म से जूझ रही थी लेकिन महाराष्ट्र के कोल्हापुर की इस जाबांज लड़की ने हौसले का दामन नहीं छोड़ा। निजी समस्याओं के बावजूद ये दिन-रात मेहनत करती रहीं और एशियाड में इतिहास लिख दिया। एशियाई खेलों के 25 मीटर पिस्टल इवेंट में वो गोल्ड जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी बन गई। राही ने 2014 के एशियाई खेलों में कांस्य पदक हासिल किया था। राष्ट्रमंडल खेलों में वो अब तक तीन बार पदक जीत चुकी हैं। 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में दो इवेंट में से एक में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था और दूसरे में रजत पदक। 2014 के एशियाई खेलों में भी उन्होंने पिस्टल शूटिंग में स्वर्ण पदक जीता था। एशियाई खेलों में ये राही का दूसरा पदक है।

5th GOLD : नौकायन में मिला एशियाड-2018 का पांचवां गोल्ड

5th GOLD : नौकायन में मिला एशियाड-2018 का पांचवां गोल्ड

18वें एशियाई खेलों में कुल 572 भारतीय एथलीटों ने शिरकत की लेकिन कुछ खिलाड़ियों को मेडल मिले तो बांकी खाली हाथ वापस आ गए। किसी ने शायद ही इस बात की उम्मीद थी रोइंग प्रतिस्पर्धा में भारत को गोल मेडल मिलेगा। भारतीय रोअर सवर्ण सिंह, दत्तू भोकानल, ओम प्रकाश और सुखमीत सिंह की चौकड़ी ने यह कमाल किया और 6 मिनट17.13 में गोल्ड मेडल जीता। इंडोनेशिया के प्रतिभागी 6 मिनट 20.58 के साथ दूसरे और थाईलैंड (6:22.41) तीसरे नंबर पर रहे। एशियाड इतिहास में यह रोइंग स्पर्धा में भारत का दूसरा स्वर्ण था। एशियाड-2018 में भारत के खाते में आया यह पांचवां गोल्ड मेडल था। भारतीय टीम ने क्वाड्रपप्ल स्कल्स टीम इवेंट में यह गोल्ड अपने नाम किया। साल 2014 के एशियन गेम्स में भारतीय टीम ने अलग-अलग इवेंट में सिर्फ तीन ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था लेकिन जकार्ता में गोल्ड से पहले दो ब्रॉन्ज भी आ चुके थे। रोहित कुमार और भगवान सिंह की जोड़ी ने मेन्स लाइटवेट डबल स्कल्स इवेंट में ब्रॉन्ज जीता था वहीं दुष्यंत ने सिंगल्स में ब्रॉन्ज जीता था

6th GOLD : 52 मिनट में मिला टेनिस डबल्स का गोल्ड

6th GOLD : 52 मिनट में मिला टेनिस डबल्स का गोल्ड

एशियाड के टेनिस डबल्स मुकाबले में रोहन बोपन्ना और दिविज शरण ने भारत को गोल्ड मेडल दिलाया। भारत की इस शीर्ष वरीयता प्राप्त जोड़ी ने कज़ाकिस्तान के अलेक्जेंडर बुब्लिक और डेनिस येवसेयेव को 52 मिनट हराकर भारत के लिए गोल्ड जीता। मैच के पहले 20 मिनट में ही भारत की इस जोड़ी ने 4-1 की बढ़त हासिल कर ली जिसके बाद उन्होंने कभी मैच में पीछे मुड़कर नहीं देखा। बोपन्ना-शरण की जोड़ी ने डोमिनेंट टेनिस खेलते हुए अपने प्रतिद्वंदी को कोई मौका नहीं दिया। भारत ने एशियाड में टेनिस के मेन्स डबल्स मुकाबले में अब तक कुल चार गोल्ड मेडल जीते हैं। साल 2010 में सोमदेव देववर्मन और सनम सिंह की जोड़ी ने गुआंगजाउ में गोल्ड मेडल जीता था। महेश भूपति और लिएंडर पेस एशियाड के इतिहास में गोल्ड जीतने वाली सबसे सफल जोड़ी हैं। उन्होंने साल 2002 और 2006 में बैक टू बैक गोल्ड मेडल जीता था। हालांकि पेस ने इस साल एक स्पेशलिस्ट पार्टनर न मिलने की बात कहकर इस खेल से अपना नाम वापस ले लिया था। साकेत मायनेनी और सनम ने साल 2014 में सिल्वर मेडल जीता था।

7th GOLD : तजिंदर पाल सिंह का 'गोल्डन थ्रो'

7th GOLD : तजिंदर पाल सिंह का 'गोल्डन थ्रो'

तजिंदर पाल सिंह तूर ने मेन्स शॉट पुट में गोल्ड मेडल जीत भारत की झोली में एशियाड का सातवां गोल्ड डाला। उन्होंने एशियन गेम्स के सातवें दिन यह उपलब्धि हासिल की। पंजाब के तजिंदर शुरुआती दिनों में एक क्रिकेटर बनना चाहते थे लेकिन, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। पिता के कहने पर उन्होंने शॉटपुट खेलना शुरू किया और ये उनकी जिंदगी का सबसे अच्छा निर्णय साबित हुआ। उन्होंने 20.75 मीटर की थ्रो के साथ एशियाड का नया रिकॉर्ड सेट किया। ओम प्रकाश करहाना ने 6 साल पहले 20.69 मीटर थ्रो फेंककर नेशनल रिकॉर्ड बनाया था, एशियाड में तजिंदर ने इसे तोड़ दिया। उन्होंने पहले थ्रो में 19.96 मीटर थ्रो किया और चीन के लियु यंग (19.52m) देकर गोल्डन थ्रो किया। 16 साल बाद तजिंदर पहले ऐसे भारतीय बने जिन्होंने इस प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता। इससे पहले बहादुर सिंह सागू ने एशियाड में 19.03m थ्रो के साथ साल 2002 में बुसान में गोल्ड मेडल जीता था। एशियाड इतिहास के शॉर्ट पुट इवेंट में यह भारत का आठवां गोल्ड था। भारतीय नौसेना के स्पोर्ट्स कोटा से खेल में शामिल हुए थे और उन्होंने अगले ओलंपिक के लिए 21-प्लस मीटर का टारगेट सेट किया है।

8th GOLD : नीरज का अचूक जैवलिन थ्रो

8th GOLD : नीरज का अचूक जैवलिन थ्रो

एशियाड में 9वें दिन नीरज चोपड़ा ने भारत को 8वां गोल्ड मेडल दिलाया। 20 वर्षीय नीरज एशियन गेम्स की जैवलिन थ्रो स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय बने। उन्होंने अपना करियर बेस्ट रिकॉर्ड तोड़कर एशियाड में गोल्ड जीता। एशियाड के इतिहास में में जैवलिन थ्रो में आज तक भारत को सिर्फ दो मेडल मिले हैं। नीरज से पहले 1982 में गुरतेज सिंह ने इस प्रतियोगिता में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था। उन्होंने 88.06 मीटर की दूरी तक जैवलिन फेंककर गोल्ड मेडल पर कब्जा जमा लिया। 6 प्रयास में नीरज दो बार फाउल (डिसक्वालिफाई) भी हुए लेकिन उन्होंने पहले प्रयास में ही बांकी खिलाड़ियों से बड़ी बढ़त बना ली थी। पाकिस्तान के अरशद नदीम ने 80.75 मीटर तक जैवलिन फेंककर ब्रॉन्ज मेडल जीता। नीरज ने गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में भी गोल्ड मेडल जीता था। वो इस एशियन गेम्स में भारत के ध्वजवाहक भी थे। ऑस्ट्रेलियाई कोच गैरी कैल्वर्ट की ट्रेनिंग में उन्होंने वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में पोलैंड में 86.48 मीटर भाला फेंक कर गोल्ड मेडल जीता था। हाल में इनका नाम विनेश फोगाट से अफेयर को लेकर जुड़ा क्योंकि वो अपनी साथी खिलाड़ी का मैच देखने के लिए स्टेडियम में मौजूद थे। उन्होंने इन बातों को बकवास बताया और बाद में विनेश ने गोल्ड जीतकर भारत आते ही एयरपोर्ट पर सगाई कर ली। विनेश ने इनकी जीत पर ट्वीट किया था 'फाइनल में परफॉर्म करो तो नीरज चोपड़ा की तरह'। नीरज ने अपना मेडल पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित किया था।

9th GOLD : समर्पण की मिसाल हैं मंजीत सिंह

9th GOLD : समर्पण की मिसाल हैं मंजीत सिंह

एशियाड के खेल में स्वर्ण जीतने वाले हरियाणा के जींद निवासी मंजीत सिंह खेल के प्रति त्याग और समर्पण की वजह से पिछले 6 महीने से घर से बाहर रहे। उन्होंने 5 महीने पहले जन्मे अपने बच्चे को न गोद में लिया और न उसका दीदार किया। ONGC ने ओलंपिक में मेडल ने जीत पाने की वजह से उनसे नौकरी छीन ली तो उनके पास इतने भी पैसे नहीं बचे थे कि वो ट्रेनिंग का 30 हजार प्रति माह का खर्च उठा सकें। मोबाइल में अपने बेटे की तस्वीर को वॉलपेपर बनाए मंजीत ने अपने कोच से वादा किया था कि घर मेडल लेकर लौटूंगा। उन्होंने अपनी कही बात को सच साबित किया। क्वालीफाइंग हीट में तीसरे नंबर पर रहने वाले मंजीत छुपे रूस्तम निकले उन्होंने न सिर्फ सभी धावकों को 800 मीटर में मात दी बल्कि मेडल के प्रबल दावेदार जिनसन जॉनशन को भी पछाड़ दिया। मंजीत ने एक मिनट 46.15 सेकंड में गोल्ड पर कब्जा किया और पूरी दुनिया को आश्चर्य में डाल दिया। 800 मीटर की हीट में जॉनसन एक मिनट 47.39 सेकंड के साथ मंजीत से आगे रहे थे लेकिन फाइनल रेस में 20 सेकेंड से पीछे हो गए और सिल्वर से संतोष करना पड़ा। जॉनसन ने इसी साल जून में श्रीराम सिंह का 42 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा था। हालांकि दो दिन बाद जॉनसन ने 1500 मीटर में गोल्ड जीता और 800 मीटर में सिल्वर की जीत में सोने की चमक की मजबूती डाल दी।

10th GOLD : अरपिंदर सिंह की गोल्डन छलांग

10th GOLD : अरपिंदर सिंह की गोल्डन छलांग

एशियाड के ट्रिपल जंप के भारतीय इतिहास में अरपिंदर सिंह ने गोल्डन छलांग लगाई। साल 2014 में इन्होंने लखनऊ में 17.17 मीटर की छलांग लगाकर नेशनल रिकॉर्ड बनाया था और खूब सुर्खियां बटोरी थी। अरपिंदर के पिता जगबीर सिंह (रिटायर्ड हवलदार) इन्हें धावक बनाना चाहते थे लेकिन इनकी टांगें भारी होने की वजह से कोच ने इन्हें किसी और एथलेटिक्स को अपना करियर बनाने की सलाह दी। धुन के पक्के ने कसम खाई थी कि वो हार नहीं मानेंगे, जो इनकी कमजोरी थी उसे मजबूती बनाई। साल 1970 में मोहिंदर सिंह गिल ने मेन्स ट्रिपल जंप में गोल्ड मेडल जीता था। 48 साल बाद एथलेटिक्स के इस इवेंट में 16.77 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड अपने नाम किया। 2014 के कॉमन वेल्थ गेम्स में इन्होंने ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था. चार साल बाद किसी मल्टी-स्पोर्टिंग इवेंट इन्होंने कोई मेडल जीता। उन्होंने एशियाड में इवेंट के दौरान तीसरे एटेम्पट में अपनी बेस्ट छलांग लगाई।

11th GOLD : 6-6 उंगलियों वाली स्वप्ना ऐसी बनीं स्वर्णपरी

11th GOLD : 6-6 उंगलियों वाली स्वप्ना ऐसी बनीं स्वर्णपरी

स्वप्ना बर्मन, एथलेटिक्स का एक एक ऐसा नाम हैं जिनकी मेहनत और शिद्दत से हर शख्स प्रेरणा ले सकता है। नाम की तरह इनकी लिए गोल्ड मेडल जीत पाना किसी सपने जैसा ही था। इस देश में 6 उंगलियों वाले लोगों के लिए एक मिथक प्रचलित है। ऐसा कहा जाता है कि वो भाग्यशाली होते हैं। उनके पैरों में कुल 12 उंगलियां हैं। इन्हें सबसे अधिक समस्या जूतों को लेकर होती थी। इनके पास ऐसे जूते नहीं होते थे जो इनके लिए सही हों। लेकिन इनके जज्बे देखकर ऐसा कभी नहीं लगा कि इन विषम परिस्थितियों के बावजूद इन्होंने हार मानी। ऐसे खिलाड़ियों के लिए एक अलग तरह के जूते की जरूरत होती है। एक अंग्रेजी वेबसाइट में छपी खबर के मुताबिक स्वप्ना आर्थिक रुप से बहुत ही कमजोर परिवार से आती हैं इनके पिता रिक्शा चलाते थे लेकिन 2013 में उन्हें स्ट्रोक आया था और तब से वो बिस्तर पर पड़े हैं। फिलहाल उनकी मां चाय के बागान में काम करती हैं, जिससे उनका परिवार चलता है। एशियन गेम्स के हेप्टाथलॉन में पहली बार भारत को गोल्ड मिला है लेकिन 21 साल की स्वप्ना ने एशियाड के एथलेटिक्स में भारत के लिए एक नया इतिहास लिख दिया है। स्वप्ना ने फाइनल में 6026 अंक हासिल किए थे, उनके जबड़े में चोट लगी लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। GoSports Foundation ने भी इस प्रतिभाशाली खिलाड़ी की मदद की जिसके चीफ मेंटर राहुल द्रविड़ हैं। उन्होंने भी ऐसी प्रतिभा को बढ़ाने का सराहनीय काम किया है।

12th GOLD : कीचड़ में दौड़ से मिला सोना

12th GOLD : कीचड़ में दौड़ से मिला सोना

एशियाड के 12वें दिन टीम इंडिया के लिए हॉकी के सेमीफाइनल मुकाबले से बुरी खबर आई। विरोधी टीमों के खिलाफ एशियाड में कुल 78 गोल दाग चुकी यह टीम थर्ड क्वार्टर तक 2-1 से आगे रहने के बावजूद मलेशिया से पेनाल्टी शूटआउट राउंड में 7-6 से हारकर बाहर हो गई लेकिन तभी एक ऐसी खबर आई जिसने हर भारतवासी के चेहरे पर मुस्कान ला दिया। जिनसन जॉनसन ने खेल के 12वें दिन 1500 मीटर की दौड़ स्पर्धा में भारत का 12वां गोल्ड मेडल जीता। जिनसन ने तीन मिनट 44.72 सेकेंड में यह मुकाम हासिल किया। बाढ़ की त्रासदी से जूझ रहे केरल के कोझिकोड़ जिले का रहने वाला यह खिलाड़ी 800 मीटर प्रतिस्पर्धा में अपने साथी मंजीत सिंह को मात नहीं दे पाए थे और सिल्वर से संतोष किया था। केरल की कीचड़ भरी खेतों में दौड़ की प्रैक्टिस करने वाले जिनसन की प्रतिभा की पहचान के.पीटर ने की थी। कोट्टायम के बेसेलियस स्पोर्ट्स कॉलेज में कोच इमानुअल जॉर्ज की इन पर नजर पड़ी थी और तब से इन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।भारत ने 12वें दिन 2 स्वर्ण, 1 रजत और दो कांस्य जीतकर एशियाड में 8वें नंबर पर काबिज था।

13th GOLD : हिरण की तरह भागने वाली हिमा दास

13th GOLD : हिरण की तरह भागने वाली हिमा दास

जुलाई में 400 मीटर जूनियर वर्ल्ड चैंपियन का ख़िताब जीतने वाली हिमा दास अब हर घर में एक जाना पहचाना नाम हो गई हैं। हिमा दास एक साधारण परिवार में जन्मी असाधारण प्रतिभा की ऐसी एथलीट हैं जिनके लिए आसमान भी कम पड़ जाए। हिमा के पिता किसान हैं और धान की खेती करते हैं। हिमा उन खेतों में जमकर दौड़ लगाती थी, उन्हें पहले फुटबॉल से काफी लगाव था लेकिन कोच निपोन दास की सलाह पर इन्होंने दौड़ को जिंदगी बनाई। 28 अगस्त को हुए 200 मीटर दौड़ के मुकाबले में उन्हें निराशा हाथ लगी और गन-शॉर्ट से पहले दौड़ जाने की वजह से वो छट गईं लेकिन एशियाड के 12वें दिन उन्होंने 4X400 रिले में स्वर्ण जीतने में अपनी टीम में सबसे अहम भूमिका निभाई और हिरण की तरह सरपट भागते हुए फर्स्ट लैप में ही अपने प्रतिद्वंदी को 30 मीटर के फासले से पीछे छोड़ा और उनकी टीम ने स्वर्ण पदक जीता। एशियाड इतिहास में महिलाओं की टीम ने लगातार 5वां स्वर्ण पदक जीता है। इस स्पर्धा में हिमा दास, पूवम्मा राजू, सरिताबेन गायकवाड़ और के विस्मया शामिल थीं। हिमा दास और उनकी टीम ने 3 मिनट 28:72 के समय में गोल्ड पर अपना कब्जा जमाया। महिलाओं की चार गुणा 400 मीटर में भारतीय लड़कियों ने स्वर्णिम दौड़ लगाई जो अब इतिहास में दर्ज है।

14th GOLD : अमित पंघल का 'गोल्डन पंच'

14th GOLD : अमित पंघल का 'गोल्डन पंच'

एशियाड में हरियाणा के अमित पंघल एकलौता ऐसा नाम हैं जिन्होंने बॉक्सिंग में गोल्ड मेडल जीता। वो इस टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचने वाले एक मात्र भारतीय मुक्केबाज थे सेमीफाइनल बाउट में अमित ने फिलीपींस के कार्लो पालम को कांटे की टक्कर में हराकर फाइनल में जगह बनाई। उन्होंने यह मुकाबला 3-2 के अंतर से जीता। एशियाई खेलों के 49 किलोग्राम भार वर्ग की श्रेणी में अमित का मुकाबला उज्बेकिस्तान के धाकड़ बॉक्सर हसनबॉय दस्तमास्तोव से था, जिन्होंने साल 2016 के रियो ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीता था। ओलंपिक चैंपियन से मुकाबला जीतना आसान नहीं था लेकिन अमित के जेहन में कुछ और था। लेफ्ट जैब के मास्टर और डिफेंस के धुरंधर कहे जाने वाले अमित ने हसनबॉय से जमकर मुकाबला किया और अपने गोल्डन पंच से नया इतिहास लिख दिया। अमित के बड़े भाई अजय भी बॉक्सर हैं लेकिन आर्थिक तंगी की वजह से उनके पिता विजेंदर पंघल ने दोनों बेटों को एक साथ स्पोर्ट्स में नहीं भेजा। अजय ने अपने भाई का करियर बनाने के लिए अपना सपना त्याग दिया और भाई के पीछे अपना सब कुछ झोंक दिया। अमित के गोल्ड जीतने में इस परिवार के त्याग की भी बड़ी भूमिका है। उन्होंने एक साक्षात्कार में बताया कि " मैं बचपन से देखता था कि कोई खिलाड़ी जब गोल्ड मेडल जीतता है तो उसके देश का झंडा ऊपर किया जाता है आज मेरे साथ हुआ तो अचानक आंखों में आंसू आ गए। पता नहीं क्या हुआ उस वक्त बस आंसू गिर रहे थे। इसे संयोग कहें या कुछ और लेकिन उन्होंने यह मुकाबला भी 3-2 के अंतर से जीता। भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर तैनात अमित पंघल के लिए ये बेहद ख़ास लम्हा था।

15th GOLD : ताश के ब्रिज इवेंट में मिला गोल्ड

15th GOLD : ताश के ब्रिज इवेंट में मिला गोल्ड

इंडोनेशिया के जकार्ता में एशियाड का चौदहवां दिन भारत के लिए एक ऐसा गोल्डन मोमेंट लेकर आया जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की हो। कोई अगर आपसे कहे कि जिस देश में ताश खेलने वाले को हीन भावना से देखा जाता है उसमें भारतीय खिलाड़ी ने गोल्ड जीता तो पहली बार में आपको विश्वास न हो लेकिन ऐसा हुआ। ब्रिज प्रतियोगिता (ताश के खेल के एक प्रारूप) में भारत के 60 वर्षीय प्रणब बर्धन और 56 साल के शिवनाथ सरकार ने गोल्ड मेडल हासिल किया। एशियन गेम्स के 14वें दिन यह भारत का 15वां गोल्ड मेडल था। यह 1951 के बाद भारत का एशियाई खेलों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। भारत ने स्वर्ण पदकों के मामले में 67 साल पुराने रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। ताश भले ही दलान से लेकर रेलवे की जनरल बॉगी में प्रसिद्ध हो लेकिन खेल का यह प्रारूप भारत में प्रोफेशनल गेम के तौर पर इतना मशहूर नहीं है लेकिन विश्व स्तर पर यह सबसे मशहूर कार्ड गेम है। इन दो खिलाड़ियों ने इसे शतरंज से भी अधिक टफ गेम बताया है यह 7 दिन तक लगातार 7 घंटे खेला जाता है और उसके बाद ही विजेता का फैसला लिया जाता है। एशियाड में इस गेम ने अपना डेब्यू किया है और गोल्डन शुरूआत भी की है।

ये ताश का खेल निकम्मो का नहीं, जिसमें एशियाड में मिला भारत को गोल्ड, जानिए सबकुछ

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    Story first published: Monday, September 3, 2018, 13:51 [IST]
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