नई दिल्ली। इंडोनेशिया में हो रहे 18वें एशियन गेम्स के पहले दिन भारत को सुशील कुमार के शुरुआती राउंड में ही बाहर होने के बाद कुश्ती में जो निराशा मिली थी, बजरंग पूनियां ने उसे गोल्ड जीतकर दूर कर दिया। बजरंग के दम के आगे जापानी पहलवान ज्यादा देर तक नहीं टिक सका और 65 किग्रा के फाइनल में जापान के ताकातानी को 11-8 के अंतर से हराकर बजरंग ने भारत का पहला दिन सुनहरा कर दिया। अगर मुकाबले की बात करें तो बजरंग ने शुरुआत काफी आक्रामक की थी और 6-0 की बढ़त बना ली थी। वहीं मुकाबला तब और रोमांचक हो गया था जब जापानी पहलवान ने एक समय स्कोर 6-6 से बराबरी पर ला दिया था। इसके बाद दोनों के बीच कांटे की टक्कर रही, जिसमें भारतीय खिलाड़ी ने बाजी मार ली।
बता दें कि इससे पहले बजरंग ने 2006 में महाराष्ट्र के लातूर में हुई स्कूल नेशनल चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था। उसके बाद से बजरंग ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसके बाद लगातार सात साल तक स्कूल नेशनल चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक उनके साथ रहा। 2009 में उन्होंने दिल्ली में बाल केसरी का खिताब भी जीता था। 2011 में बजरंग ने विश्व जूनियर चैंपियनशिप में भी गोल्ड की बाजी मारी थी।
Breaking News: India get 1st GOLD MEDAL of #AsianGames2018 as Bajrang Punia beats Japanese grappler 10-8 in Final (FS 65 kg). yupeeeeeee #AsianGames2018 pic.twitter.com/fMshTJ8tzE
— India@AsianGames2018 (@India_AllSports) August 19, 2018
पिता ने हालात के आगे सपनों से किया था समझौताः बजरंग के पिता बलवान पूनिया भी अपने समय के प्रसिद्ध पहलवानों की गिनती में शुमार हो सकते थे, लेकिन परिवार में छाई गरीबी और घर की जिम्मेदारी कंधों पर होने के कारण उन्हें अपना यह शौक बीच में छोड़ देना पड़ा। बजरंग और उनके परिवार ने बड़ी करीब से गरीबी देखी है। दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में कुश्ती का ककहरा सीख रहे पुत्र को देशी घी देने के लिए पिता बलवान बस का किराया बचाने के लिए कई बार साइकिल पर गए। तो बजरंग की मां ओमप्यारी ने चूल्हे की कालिख सहकर लाडले को शुद्ध दूध भिजवाया है लेकिन आज बजरंग ने उसी आग में तपकर अपने आप को सोने जैसा निखारा है।