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बेंगलुरु टेस्ट: भारत की जीत और वो पल जहां से पलट गया मैच

हार के मुंह से जीत कैसे छीनी जाती है, ये टीम इंडिया ने दिखाया

By Bbc Hindi

भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच बेंगलुरु में खेला गया दूसरा टेस्ट मैच दिलचस्पी पैदा करने और उसे बनाए रखने के मामले में लंबे वक़्त तक याद किया जाएगा.

एक बार लग रहा था कि पुणे में हारने के बाद बेंगलुरु में भी टीम इंडिया के हिस्से हार आएगी और सिरीज़ हाथ से निकल जाएगी.

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मैच के बाद भारतीय टीम के कप्तान ने इसे भावनात्मक लम्हा और सबसे बढ़िया जीत क़रार दिया. और उनकी भावनाएं समझी जा सकती हैं.

इसकी वजह ये कि मैच कई बार पलटा. पहले दिन ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों ने एक बार फिर भारतीय बल्लेबाज़ी की कमर तोड़ी और स्कोर 200 पार नहीं जाने दिया.

दिन ख़त्म हुआ तो भारतीय टीम 189 रन पर सिमट चुकी थी और ऑस्ट्रेलिया बिना किसी नुकसान के 40 तक पहुंच चुका था.

दूसरे दिन टीम इंडिया के गेंदबाज़ों का इम्तिहान था और उन्होंने काफ़ी जीवट दिखाया. दिन भर शानदार गेंदबाज़ी की लेकिन दिन ख़त्म होते-होते कंगारुओं ने मैच पर अपनी पकड़ बना ली.

दूसरा दिन ख़त्म हुआ तो 6 विकेट पर 237 रनों बनाकर ऑस्ट्रेलिया मज़बूत दिखने लगा.

वो मौक़ा जहां से मैच का रुख़ पलटा

लेकिन असली खेल हुआ तीसरे दिन और मैच कभी इस तरफ़ कभी उस तरफ़ झूलने लगा. दिन के शुरुआती लम्हों में भारतीय गेंदबाज़ों ने कंगारुओं को जल्दी समेट दिया. पारी ख़त्म हुई 276 रनों पर.

और बढ़त मिली 87 रनों की जो बेंगलुरु की पिच पर काफ़ी ख़तरनाक लग रही थी.

इस लीड को उतारने तक भारत ने दो विकेट गंवा दिए थे और 120 रन पर चार. बढ़त थी सिर्फ 25 रन और मैच हाथ ने निकलता दिख रहा था. लेकिन तभी वो हुआ जिसका काफ़ी देर से इंतज़ार था.

चेतेश्वर पुजारा को अच्छी शुरुआत मिल रही थी लेकिन वो इसका फ़ायदा नहीं उठा पा रहे थे. और सामने थे अजिंक्ये रहाणे जो फिरकी गेंदबाज़ी के सामने काफ़ी जूझ रहे थे. लेकिन दोनो बल्लेबाज़ों ने मैच पलटना शुरू किया.

अच्छी गेंदों को सम्मान दिया और ढीली गेंदों को सीमा पार भेजने का इंतज़ाम किया. साथ ही स्ट्राइक रोटेट भी की.

जो स्टीव ओ कीफ़ और नाथन लियॉन ख़तरनाक साबित हो रहे थे, उन्हें स्वीप से ठिकाने लगाना शुरू किया. तेज़ गेंदबाज़ों की बॉल थर्ड मैन की तरफ़ भेजकर रन जुटाना शुरू हुआ.

दिन का खेल ख़त्म हुआ तो भारत चार विकेट पर 213 रन बना चुका था. पुजारा-रहाणे की साझेदारी मज़बूत दिख रही थी. बढ़त थी लेकिन जीतने लायक नहीं.

चौथे दिन यही उम्मीद थी कि ये दोनों बढ़त को 200 पार ले जाएंगे और भारत जीत सूंघने लगेगा. पुजारा-रहाणे की जोड़ी ने संभलकर खेलना शुरू किया और बढ़त को बढ़ाने की कोशिश की.

दोनों के बीच 118 रनों की पार्टनरशिप हुई जो अंत में मैच जिताने वाली साबित हुई. रहाणे की विकेट गिरा तो स्कोर 238 रनों पर था और पूरी टीम 274 रनों पर सिमट गई.

ऑस्ट्रेलिया के सामने 188 रनों का लक्ष्य था और उसके सलामी बल्लेबाज़ डेविड वॉर्नर ने तेज़ शुरुआत की. कंगारू टीम का स्कोर 42 रन था जब दूसरे विकेट के रूप में वॉर्नर पवेलियन लौटे.

यहीं से मैच की दिशा पलटने वाला दूसरा पल आया. रविचंद्रन अश्विन की फिरकी क़ातिलाना साबित हुई और ऑस्ट्रलिया को संभलने का मौक़ा नहीं मिला.

पहली पारी में रवींद्र जडेजा ने 6 विकेट चटकाए थे लेकिन दूसरी पारी में अश्विन के 6 विकेट बेशक़ीमती साबित हुए.

यूं तो टीम की जीत में हर खिलाड़ी का योगदान अहम होता है लेकिन पुजारा-रहाणे की साझेदारी ने ना केवल रन बटोरे बल्कि वो साहस भी बटोरा जो टीम इंडिया में नहीं दिख रहा था.

मैच पलटा, सिरीज़ में बराबरी आई और आगे लड़ने की ताक़त भी. कप्तान कोहली ने भी कह दिया है कि अब टीम पीछे मुड़कर नहीं देखेगी.

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:20 [IST]
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