रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने कई मौकों पर प्रदेश का नाम रोशन करने वाले आदिवादी तीरंदाज संतराम बैगा को चपरासी की नौकरी दी है। संतराम बीते सात सालों में दस बार राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। बैगा 2007- 2008 में तमिलनाडु और जमशेदपुर में खेले गए नेशनल टूर्नामेंट में दो सिल्वर मेडल और स्टेट टूर्नामेंट में छत्तीसगढ़ के लिए 15 गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। तीरंदाजी के लिए राज्य के श्रेष्ठ प्रवीर चंद भंजदेव राज्य स्तरीय खेल पुरस्कार से भी बैगा को सम्मानित किया जा चुका है। राज्य सरकार ने राष्ट्रीय स्तर के इस खिलाड़ी को चपरासी की नौकरी दी है। राज्य के तीरंदाजी संघ ने पत्र लिखकर सरकार से संतराम का ओहदा बढ़ाने की मांग की है।
संतराम बैगा को तीरंदाजी के लिए कोई सरकारी सहायता नहीं मिली। तीरंदाजी खर्चीला खेल है, इस वजह से इस खेल को संतराम बैगा ज्यादा दिनों तक जारी नहीं रख पाए। उन्होंने प्रदेश सरकार से नौकरी मांगी तो उन्हें चपरासी की नौकरी मिली। बीते तीन साल से बैगा मजदूरी कर रहे हैं। मेहनत मजदूरी करने के बाद राज्य सरकार ने इस खिलाड़ी को गांव के स्कूल में चपरासी के पद पर नियुक्ति दे दी है।
सरकार का कहना है कि संतराम बैगा को उनकी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर नियुक्ति दी गई है। वह सिर्फ बारहवीं पास है। बीए फस्ट ईयर में उन्होंने दाखिला लिया है। स्पोर्ट कोटे से उन्हें चतुर्थ श्रेणी अर्थात चपरासी के पद पर नियुक्ति दी गई है।