नई दिल्ली। अखाड़ों में अपने दांव पेंच से मैदान मारने वाली कुश्ती खिलाड़ी दिव्या काकरान की उम्मीदों का गला सिस्मट घोंटते दिखाई दे रहा है। विपक्षी खिलाड़ियों को पस्त करने वाली ये बिटिया सिस्टम के दांव पेंच में उलझती दिखाई दे रही है। दिव्या के पिता सूरज पहलवान का कहना है कि रेलवे में नौकरी के लिए उसकी बेटी से अधिकारियों ने 10 लाख रुपए की मांग की है। पैसे ना होने की वजह से दिव्या को ना नौकरी मिल रही है ना ही कहीं सुनवाई हो रही है।
पिछले तीन साल से वह नौकरी के लिए चक्कर लगाकर थक चुके हैं, तीन बार फाइल भी दे चुके हैं, लेकिन रेल भवन में बैठे अधिकारियों द्वारा नौकरी देने से पहले 10 लाख रुपये रिश्वत मांगी जा रही है। इसकी शिकायत वह आला अधिकारियों से भी कर चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
प्रधानमंत्री मोदी कर चुके हैं सम्मानित :
मुजफ्फरनगर के पुरबालियान निवासी सूरज पहलवान की बेटी दिव्या काकरान ने कुश्ती में खासी ख्याति प्राप्त कर ली है। दिव्या ने कामनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक अपने नाम किया था। उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सम्मानित कर चुके ह।प्रधानमंत्री की ओर से सम्मान के रूप में दस लाख की धनराशि भी दी गई। कई बार उसे नौकरी देने की घोषणा भी की गई लेकिन नौकरी के नाम पर उसे दफ्तरों के चक्कर के अलावा अभी तक कुछ हासिल नहीं हुआ है।
अधिकारी की सफाई:
रेलवे एथलेटिक्स कुश्ती कोच राजकुमार का कहना है कि दिव्या से पैसों की कोई डिमांड नहीं हुई है उनके चयन की प्रक्रिया जारी है।बता दें कि दिव्या 15 अगस्त से जकार्ता में शुरू हो रहे एशियन गेम्स में भाग लेने के लिए 12 अगस्त को जर्काता जा रही हैं।
गौरतलब है कि दिव्या काकरान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 63 मेडल जीत चुकी है। दिव्या सात बार भारत केसरी, एक बार राजस्थान केसरी और एक बार महारानी केसरी रह चुकी है।