मुकेश शर्मा
खेल संपादक, बीबीसी हिंदी
राष्ट्रमंडल खेलों से लगभग एक पखवाड़े पहले खेल मंत्री एमएस गिल ने सभी को आश्वस्त करने की कोशिश करते हुए कहा है कि खेलों के दौरान 120 प्रतिशत सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी.
बीबीसी हिंदी के साथ विशेष साक्षात्कार में डॉक्टर गिल ने कहा, "खेलों में हिस्सा ले रहे 71 देशों के सुरक्षा अधिकारी हर महीने भारत आते हैं और वे पूरी तरह आश्वस्त हैं."
उन्होंने कहा कि भारत 100 नहीं 120 प्रतिशत सुरक्षा मुहैया करा रहा है और इस दौरान दिल्ली में एक लाख सुरक्षाकर्मी तैनात हो रहे हैं.
मगर साथ ही डॉक्टर गिल इतनी सुरक्षा की वजह से दर्शकों को होने वाली परेशानी से चिंतित हैं. उन्होंने कहा, "मैं तो सुरक्षा एजेंसियों को कह रहा हूँ कि कहीं ये इतना ज़्यादा न हो जाए कि नागरिकों को आना मुश्किल हो जाए."
दिल्ली में लगातार बारिश की वजह से डेंगू के ख़तरे और उसे लेकर विदेशी एथलीट्स में चिंता पर भी डॉक्टर गिल ने सभी को आश्वस्त करने की कोशिश की.
उन्होंने कहा, "सरकार युद्ध स्तर पर काम कर रही है और किसी को भी चिंता करने की ज़रूरत नहीं है."
समय पर सवाल
वैसे गिल ने खेलों के समय को लेकर एक बार फिर नाख़ुशी ज़ाहिर की. उनका कहना था, "मैं तो कहता हूँ कि शादी, चुनाव और खेल कराने का सही समय तो नवंबर का होता है तो खेल तो नवंबर में कराने चाहिए थे."
मगर साथ ही उन्होंने माना कि नवंबर में चीन में होने वाले एशियाई खेलों को देखते हुए ही शायद ये खेल अक्तूबर में कराने का फ़ैसला किया गया.
खेल मंत्री का कहना था कि केंद्र सरकार से जितना पैसा माँगा गया वो पूरा पैसा खेलों की आयोजन समिति को मुहैया कराया गया है और कभी भी ख़र्च पर कोई सवाल नहीं पूछा गया.
मगर खेलों के आयोजन में भ्रष्टाचार की जाँच के बारे में गिल ने कहा, "प्रधानमंत्री से लेकर पूरी कैबिनेट तक ने संसद में कहा है कि अगर कोई भी कमी-बेसी हुई है तो क़ानून के मुताबिक़ हम उससे निबटेंगे."
तैयारी पहले
खेल मंत्री भविष्य में किसी बड़े खेल आयोजन से पहले उस आयोजन के व्यावहारिक पहलुओं की जाँच कराना चाहते हैं. उन्होंने कहा, "इतना बड़ा आयोजन करना काफ़ी बड़ा काम होता है. मेरा इतना ही कहना है कि अगर भारतीय ओलंपिक महासंघ को आगे चलकर कोई बड़ा आयोजन करना है तो उसके व्यावहारिक पहलुओं का अध्ययन करना चाहिए."
गिल के अनुसार उसके बाद लिखित रूप में एक पूरी योजना खेल मंत्रालय को सौंपी जानी चाहिए. फिर उस पर वित्त और गृह मंत्रालय से सलाह मशविरे के बाद ही वह प्रस्ताव कैबिनेट में लेकर जाएँगे.
उनका कहना था, "मुझे इस बारे में अंतिम फ़ैसला नहीं करना है ये फ़ैसला कैबिनेट का होगा क्योंकि ज़िम्मेदारी अगले 20 सालों की ले रहे हैं, 50 हज़ार करोड़ रुपयों का ले रहे हैं. ये नहीं होगा कि कच्ची चिट्ठी रात को लिख दें और कहें कि सुबह तक हाँ कर दें."